Snake Charmer's Flute: जब से हम छोटे थे तो मोहल्ले में अक्सर सपेरे आया करते थे और जैसे ही वो बीन बजाते थे, सांप पिटारे से निकलकर नाचने या लहराने लगता था. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि सांप के जब कान ही नहीं होते तो वह बीन की आवाज को कैसे सुन लेता है? साइंस की मानें तो यह सांप का एक डिफेंस सिस्टम है और ये एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है. तो आइए साइंस इस बारे में क्या कहता है ये जान लीजिए, हो सकता है आप भी इस सच्चाई को न जानते हों.
पॉपुलर साइंस के अनुसार, सांपों के अन्य जानवर या जीव बिल्ली, चूहा आदि की तरह बाहरी कान नहीं होते और इसी कारण सांप हवा में म्यूजिक की वेब्स को उस तरह नहीं सुन सकते जैसे इंसान या अन्य जीव सुनते हैं. सांप के पास केवल आंतरिक कान का संरचना होता है जो उनके जबड़े की हड्डी से जुड़ा होता है.
जब सपेरा बीन बजाता है तो सांप संगीत नहीं सुन रहा होता बल्कि वह बीन की बनावट और सपेरे के हाथों की हलचल को एक खतरे के रूप में देखता है तभी तो सपेरा बीन को बजाते समय इधर-उधर, आगे-पीछे हाथ के मूवमेंट के साथ बीन घुमाता है.
स्मिथसोनियन का नेशनल जू की रिसर्च बताती है, सपेरा जब अपनी बीन को दाएं-बाएं हिलाता है तो सांप अपना फोकस उस हिलती हुई चीज (बीन) पर करता है. सांप बीन को एक दुश्मन या शिकारी मान लेते हैं और अपनी जान बचाने के लिए वे उसकी हर हरकत पर नजर रखते हैं जिससे वो बीन की दिशआ में ही अपनी गर्दन घुमाते हैं. सांप के इसी डिफेंस पोज को लोग 'सांप का नाचना' समझने लगते हैं.
नेशनल जियोग्राफिक के मुताबिक, सांपों की सुनने की क्षमता भले ही सीमित हो लेकिन वे बीन के कारण होने वाली जमीन के कंपन को काफी आसानी से पहचान लेते हैं. सांप जमीन से आने वाली सूक्ष्म तरंगों को महसूस कर लेते हैं. जब सपेरा बीन बजाते समय अपने पैरों या घुटनों को जमीन पर थपथपाता है तो उन कंपनों से सांप अलर्ट हो जाते हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क