चश्मों से चोरी-छिपे लड़कियों के बन रहे वीडियो! होटल-पार्क-सड़क, हर जगह से लीक हो रहे प्राइवेट मोमेंट

Smart Glasses Privacy Risks: महिलाओं की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है. हाल ही में आई कुछ खबरों के अनुसार, स्मार्ट ग्लासेस से महिलाओं को बिना बताए बातचीत के दौरान रिकॉर्ड किया जा रहा है और बाद में इन वीडियो को सोशल मीडियो पर पोस्ट किया जा रहा है. इसकी वजह से कई महिलाएं काफी परेशान हैं.

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स्मार्ट ग्लासेस बन रहे महिलाओं की प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा (Photo- Getty Image) स्मार्ट ग्लासेस बन रहे महिलाओं की प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा (Photo- Getty Image)

टियासा भोवाल

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:57 AM IST

Smart Glasses Privacy Risks: टेक्नोलॉजी ने हमारी रोजाना की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है. लेकिन कई बार यही सुविधा परेशानी और डर की वजह भी बन जाती है. ऐसे ही स्मार्ट ग्लासेस जो हाथों को फ्री रखकर फोटो लेने, तुरंत ट्रांसलेशन और वॉयस असिस्टेंट जैसी सुविधाओं के लिए बनाए गए थे, अब लोगों की प्राइवेसी के लिए खतरा बनते जा रहे हैं, खासकर महिलाओं के लिए. दुनिया भर में बिना बताए रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करना और हरासमेंट जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

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धोखे से बनाया जाता है वीडियो
कुछ लोगों के लिए स्टाइल और शौक की चीज बने ये स्मार्ट ग्लासेस, कई महिलाओं के लिए बुरा सपना साबित हो रहे हैं. खासतौर पर इन्हें ऐसे लोग इस्तेमाल कर रहे हैं जो खुद को ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ कहते हैं. इनका मकसद बातचीत के नाम पर महिलाओं को साइकोलॉजिकली मैनिपुलेट कर कंटेंट बनाना रहता है.

कई महिलाओं का कहना है कि बस स्टॉप, बीच, सड़क या पब्लिक जगहों पर स्मार्ट ग्लास पहनकर पुरुष बिना बताए उन्हें रिकॉर्ड कर लेते हैं. बाद में ये वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिए जाते हैं, साथ में हरासिंग कमेंट्स और हैशटैग्स भी होते हैं.

स्मार्ट ग्लासेस का गैर कानूनी इस्तेमाल
पिछले महीने इंग्लैंड में एक महिला ने 47 साल के एक व्यक्ति को कोर्ट तक घसीटा. महिला का आरोप था कि होटल में समय बिताने के दौरान उस आदमी ने प्राइवेट मोमेंट की चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग कर ली और बाद में वीडियो उसे भेज दिए. महिला को इसकी कोई जानकारी नहीं थी और उसने कभी इजाजत नहीं दी थी.

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सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कोर्ट ने आरोपी को जेल नहीं भेजा. ये मामला अकेला नहीं है. ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जो महिलाओं की प्राइवेसी और सेफ्टी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

अमेरिका की एक और महिला उस वक्त सोशल मीडिया पर रो पड़ीं, जब उन्हें पता चला कि एक आदमी ने उन्हें उनकी इजाजत के बिना रिकॉर्ड कर लिया था. यह घटना एक सुपरमार्केट में हुई. वहां एक आदमी ने हरक्यूलिसे (Herculyse) नाम की महिला से हल्की-फुल्की बातचीत की, उनकी तारीफ की और फिर चला गया. उस समय हरक्यूलिसे ने बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है. बाद में उन्हें पता चला कि उसी वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड भी कर दिया गया है.

पब्लिक जगहों पर प्राइवेसी का खतरा
अभी ज्यादातर जगहों पर पब्लिक जगह पर रिकॉर्डिंग करना गैर-कानूनी नहीं है. मोबाइल फोन में कैमरा साफ दिखाई देता है, इसलिए सामने वाला समझ जाता है कि उसे रिकॉर्ड किया जा रहा है और उसी हिसाब से खुद को संभाल लेता है. लेकिन स्मार्ट ग्लासेस में यह पता नहीं चलता. कैमरा आंखों पर चढ़े चश्मे में छिपा होता है, जिससे पता ही नहीं चलता कि कोई वीडियो बना रहा है या नहीं.

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कानून अब भी पीछे हैं
अमेरिका और ब्रिटेन में प्राइवेसी से जुड़े कानून जगह-जगह अलग हैं. कई जगहों पर पब्लिक स्पेस में बिना इजाजत वीडियो रिकॉर्ड करना गैरकानूनी नहीं माना जाता, जब तक वह ऑडियो रिकॉर्डिंग न हो या कोई प्राइवेट जगह न हो.

भारत में क्या हाल है
भारत में भी अभी स्मार्ट ग्लासेस को लेकर कोई खास कानून नहीं है. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में यह जरूरी नहीं है कि पब्लिक जगह पर रिकॉर्डिंग करते समय सामने वाले को बताया जाए. न ही ऐसा कोई नियम है जिससे कोई इंसान यह जान सके कि उसका वीडियो बना है या उसे हटवाने की मांग कर सके.

इसका मतलब यह है कि कोई व्यक्ति कैफे, मेट्रो, पार्क या मंदिर में रिकॉर्ड हो सकता है और उसे पता भी न चले. टेक कंपनियां बस सलाह देती हैं कि अगर कोई आपत्ति करे तो रिकॉर्डिंग बंद कर दें लेकिन यह सलाह है, नियम नहीं.

अब आगे क्या
सच यह है कि महिलाओं की प्राइवेसी को पूरी तरह सेफ रखने का कोई आसान तरीका नहीं है. ऐसे में महिलाओं को अलर्ट रहने की जरूरत है. इसके साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि स्मार्ट ग्लास कैसे दिखते हैं और उन्हें पहचाना कैसे जा सकता है. 

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वहीं, पब्लिक जगहों पर रिकॉर्डिंग को लेकर क्लियर और स्ट्रिक्ट नियम बनाए जाने की जरूरत है, ताकि बिना इजाजत रिकॉर्ड किए गए लोगों को अपने अधिकार मिल सकें. साथ ही ऐसी टेक्नोलॉजी की भी जरूरत है जो सिर्फ पहनने वाले की अच्छी नीयत पर निर्भर न रहे क्योंकि हर कोई इसका सही इस्तेमाल करे, यह जरूरी नहीं.

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