Scientific reasons for bathing after funeral: आपने देखा होगा जब आप किसी के अंतिम संस्कार या शमसान घाट से घर आते हैं तो आपके पैरेन्ट्स घर के बाहर ही नहाने के लिए कहते हैं. हालांकि घर आकर नहाने की परंपरा सदियों पुरानी है लेकिन इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण छिपा हुआ है. माना कि कई लोग इसे धार्मिक कारण से भी जोड़ते हैं लेकिन काफी कम लोग होंगे जो इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों के बारे में जानते होंगे. तो आइए आज हम इसके पीछे के साइंटिफिक कारण बताते हैं जिन्हें जानना सभी को जरूरी है.
LastJourney पर दी गई जानकारी के मुताबिक, मृत्यु के बाद उस इंसान शरीर का इम्यून सिस्टम खत्म हो जाता है जिससे पेट के बैक्टीरिया ई.कोलाई, क्लॉस्ट्रिडियम आदि तेजी से बढ़ने लगते हैं और शरीर को सड़ाने लगते हैं. ये बैक्टीरिया श्मशान में धुआं, राख, भीड़ और जानवरों के संपर्क में आ जाते हैं और ये हानिकारक जर्म्स स्किन और कपड़ों पर चिपक जाते हैं.
साबुन से नहाने से आपकी स्किन और कपड़ों से ये ऊपरी जर्म्स हट जाते हैं, जिससे घर पर परिवार के सदस्यों में इन्फेक्शन या पैथोजन्स फैलने का खतरा कम हो जाता है. पुराने समय में वैक्सीन न होने पर ये बचाव का सरल तरीका था लेकिन आज भी हाइजीन के लिए ये जरूरी है.
360haz के मुताबिक, जब किसी इंसान की मृत्यु होती है तो शरीर बैक्टीरिया से लड़ नहीं पाता इसलिए पेट के माइक्रोब्स बढ़ते हैं और शरीर को सड़ाने लगते हैं. अब ऐसे में जो लोग डेड बॉडी को छूते हैं या उसके पास रहते हैं या खुले ताबूत या चिता के पास खड़े होते हैं, उनके हाथों, कपड़ों या खुली स्किन पर ये बैक्टीरिया लग सकते हैं. नहाने से ऐसे माइक्रोब्स नाक, मुंह, खाने या परिवार के सदस्यों तक पहुंचने से पहले ही धुल जाते हैं.
रिपोर्ट का कहना है, बीमारी से बचाव के अलावा, अंतिम संस्कार के बाद नहाने से शोकाकुल लोगों को रूटीन लाइफ में वापस आने में मदद मिलती है. यह दुखी मन को शांत करता है. साइंस के अनुसार, गर्म पानी (40°C) से नहाने से हाइपरथर्मिक एक्शन होता है जिससे वासोडिलेशन से ब्लड फ्लो बढ़ता है, ऑक्सीजन-न्यूट्रिएंट्स पहुंचाता है. पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिवेट होकर कोर्टिसॉल (स्ट्रेस हार्मोन) घटाता है.
Hss.gov.nt.ca का कहना है कि हेपेटाइटिस, ट्यूबरकुलोसिस या कुछ वायरल हेमोरेजिक जैसी कुछ इंफेक्शन बीमारी से जब इंसान की मृत्यु होती है तो इंफेक्शन मौत के बाद भी शरीर के फ्लूइड में रह सकते हैं और उन लोगों को इंफेक्ट कर सकते हैं जो मरे हुए व्यक्ति को छूते हैं या उसके करीब रहते हैं.
संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों से निपटने के लिए पब्लिक हेल्थ गाइडलाइंस में संक्रमण का खतरा कम करने के लिए उस व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद हाथ और स्किन को अच्छी तरह धोने पर जोर दिया जाता है. इसलिए इन बीमारियों से बचे रहने के लिए अंतिम संस्कार के बाद नहाया जाता है.
श्मशान घाट में अक्सर राख, धुआं, जानवरों की लाशें और जानवरों की बीट होती है जिनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं और ऐसा माहौल माइक्रोबियल रिज़र्वॉयर की तरह काम करता है. ऐसे में यदि आप वहां से आकर नहा लेते हैं तो जमी हुई धूल, राख या माइक्रोब्स को हटाने में मदद मिलती है जो फ्यूनरल सेरेमनी के दौरान आपके शरीर पर आ सकते हैं.
पहले के समय में, हेपेटाइटिस, चेचक और दूसरी बीमारियों के लिए वैक्सीन नहीं मिलती थीं इसलिए थोड़े से भी संक्रमण से गंभीर बीमारियां हो सकती थीं. अंतिम संस्कार के बाद नहाना संक्रमण का जोखिम कम करने के लिए उस समय बचाव का तरीका था जब मेडिकल साइंस इतना आगे नहीं बढ़ा था.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क