Rice consumption in india: दाल-चावल हो, बिरयानी हो या सादा भात… हर भारतीय की थाली में चावल की मौजूदगी होती ही है. उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम भारत तक, करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के खाने में किसी ना किसी रूप में चावल जरूर शामिल करते है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि औसतन एक भारतीय सालभर में कितना चावल खा जाता है? सरकारी आंकड़े और रिपोर्ट बताती हैं भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल की खपत वाले देशों में शामिल है. आइए, डेटा के आधार पर समझते हैं कि भारतीयों की थाली में चावल की हिस्सेदारी आखिर कितनी बड़ी है.
भारत में चावल की खपत को लेकर अलग-अलग संस्थानों के आंकड़े सामने आते हैं और इनकी गणना का तरीका भी अलग होता है. यूनाइटेड नेशन एजेंसी के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) पर बेस्ड डेटाबेस और Helgi Library जैसे प्लेटफॉर्म के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति सालाना चावल खपत 80 से 100 किलो के बीच बताई गई है.
Statista के 2023 के कलेक्टिव डेटा में औसतन 226 ग्राम प्रतिदिन यानी करीब 82 किलो चावल की सालाना खपत बताई गई है. हालांकि ये आंकड़े नेशनल लेवल पर प्रोडक्शन, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट और अवेलिबिलिटी के आधार पर तैयार किए जाते हैं जिन्हें Apparent consumption कहा जाता है.
दूसरी ओर, भारत सरकार के नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) द्वारा जारी किए गए ‘हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे 2022-23’ घर-घर जाकर किए गए सर्वे पर आधारित है. इस सर्वे के अनुसार ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति सालाना चावल खपत लगभग 60-65 किलो है और वहीं शहरी इलाकों में चावल की खपत 45-50 किलो के बीच है.
दोनों आंकड़ों में अंतर दिखता है क्योंकि फर्क मापने के तरीके का है. एक आंकड़ा यह देखकर निकलता है कि देश में कुल कितना चावल उपलब्ध है और उसे आबादी से बांट दिया जाता है जिससे एक औसत अनुमान निकलता है. और वहीं दूसरा आंकड़ा आंकड़ा घर-घर जाकर पूछकर जो सर्वे किया जाता है कि उन्होंने कितना चावल खाया या खरीदा है. इसी वजह से दोनों में थोड़ा अंतर दिखता है.
एक्सपर्ट मानते हैं कि दोनों आंकड़े गलत नहीं हैं बल्कि मापने के तरीके अलग हैं. इसलिए भारत में प्रति व्यक्ति सालाना चावल खपत 60 से 90 किलो के बीच मानी जा सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस सोर्स को आधार बना रहे हैं.
CEDA स्टडी बताती है कि 1993 से ग्रामीणों में अनाज की खपत 13.4 किलो प्रति महीने से घटकर 9.4 किलो प्रति महीने हो गई है. वहीं शहरों में यह मात्रा 10.6 किलो प्रति महीने से 8 किलो प्रति महीने तक पहुंच गई है. चावल के साथ दूध, अंडा, मीट, फल-सब्जी खाने की मात्रा बढ़ी है.
FAO का आउटलुक कहता है कि आने वाले सालों में दुनिया भर में प्रति व्यक्ति चावल खपत थोड़ी बढ़ने की संभावना है लेकिन भारत जैसे देशों में पैटर्न ज्यादा 'डाइवर्स डाइट' की तरफ जा रहा है यानी लोग चावल तो खाएंगे लेकिन उसके साथ अन्य चीजें भी खाएंगे.
दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल की डाइट और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट सहर (Ms. Sahar) ने Aajtak.in को बताया, 'भारत में चावल मुख्य भोजन का हिस्सा है और यह शरीर को एनर्जी देने का अच्छा सोर्स है क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होता है. 18 साल से अधिक उम्र के एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजाना करीब 150 से 250 ग्राम पका हुआ चावल पर्याप्त होता है.'
'पुरुषों को अधिक एनर्जी की जरूरत होती है इसलिए वे 200 से 250 ग्राम तक चावल ले सकते हैं जबकि महिलाओं के लिए 150 से 200 ग्राम चावल पर्याप्त माना जाता है.'
'हालांकि, फिटनेस फ्रीक वाले 200 से 300 ग्राम खा सकते हैं लेकिन वजन कंट्रोल करने वाले लोगों को चावल की मात्रा सीमित रखनी चाहिए. ऐसे लोगों के लिए रोजाना 100 से 150 ग्राम पका हुआ चावल पर्याप्त होता हैय
चावल के साथ दाल, सब्जियां, सलाद या दही लेने से पोषण संतुलित रहता है और ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिलती है.'
'जरूरत से ज्यादा चावल खाने से वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है इसलिए मात्रा और संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है.'
चावल के इतना लोकप्रिय होने के पीछे सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि पोषण प्रोफाइल और पकाने के आसान तरीके में भी है. चावल पकाने में आसान है और यह कम समय में तैयार हो जाता है, जो इसे वर्किंग क्लास की पहली पसंद बनाता है. साथ ही जिम और फिटनेस फ्रीक लोग रोटी की अपेक्षा चावल खाना अधिक पसंद करते हैं क्योंकि वो जल्दी डाइजेस्ट होता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि 'सफेद चावल' की तुलना में अब लोग धीरे-धीरे 'ब्राउन राइस' या 'मल्टीग्रेन' की तरफ भी मुड़ रहे हैं.
गांव में शहरों की अपेक्षा अधिक चावल खाया जाता है. अशोका यूनिवर्सिटी की CEDA स्टडी के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में हर महीने 5.3 किलो चावल प्रति व्यक्ति और सालाना करीब 63 किलो चावल खाता है. शहरों में ये मात्रा कम है. पूर्वी भारत के राज्य जैसे बंगाल, ओडिशा में ये मात्रा 9-10 किलो प्रति महीने तक पहुंच जाती है लेकिन पंजाब-हरियाणा में चावल की अफेक्षा लोग गेहूं अधिक खाते हैं.
HCES 2023-24 डेटा यही कहता है कि गांव की थाली में चावल अहम रूप से शामिल होता है.
NSO की हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे 2022-23 रिपोर्ट के मुताबित, पूरे भारत में करीब 55.35 प्रतिशत लोग चावल खाते हैं. सबसे अधिक चावल खाने वाले राज्यों में असम (95.93 प्रतिशत), आंध्रप्रदेश (92.22 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (92.24 प्रतिशत), तमिलनाडु (90.72 प्रतिशत) और तेलंगाना (92.06 प्रतिशत) चावल खाते हैं.
सबसे कम चावल खाने वाले राज्यों में राजस्थान (3.19 प्रतिशत), हरियाणा (9.77 प्रतिशत), पंजाब (11.60 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (27.37 प्रतिशत) और गुजराज (31.42 प्रतिशत) शामिल हैं.
ज्यादा चावल खाने से शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ती है, जिससे शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है. इसलिए आंकड़ों में भले ही हम आगे हों लेकिन सेहत के लिहाज से मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क