प्रोटीन है सबसे अच्छी 'दवाई'... दिल के डॉक्टर ने गिनाए Protein के फायदे और तोड़े मिथक

सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ने के बावजूद प्रोटीन को लेकर कई मिथक मार्केट में हैं जिन पर लोग आंख बंद करके विश्वास कर लेते हैं. एक कार्डियोलॉजिस्ट ने प्रोटीन को 'बेस्ट मेडिसिन' बताते हुए इन मिथकों को तोड़ा है.

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प्रोटीन फूड्स हर किसी के लिए फायदेमंद होते हैं. (Photo: PIXABAY) प्रोटीन फूड्स हर किसी के लिए फायदेमंद होते हैं. (Photo: PIXABAY)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

सेहत को लेकर पिछले कुछ सालों में लोग काफी अवेयर हुए हैं. लोगों ने अच्छी डाइट लेनी शुरू की है, जिम जा रहे हैं, सुबह घूमने जा रहे हैं और हेल्दी चीजों को अपनी डाइट का हिस्सा बना रहे हैं. लेकिन आज भी लोगों के मन में जो सबसे बड़ा भ्रम है वो है ‘प्रोटीन’. किसी का मानना है कि अधिक प्रोटीन खाने से किडनी खराब हो सकती हैं तो किसी को लगता है कि अधिक प्रोटीन खाने से वजन बढ़ जाता है. इसी बीच एक कार्डियोलॉजिस्ट ने इन मिथकों को तोड़ते हुए अपनी बात रखी और प्रोटीन को सबसे अच्छी मेडिसिन बताया. 

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डॉक्टर का कहना है कि सही मात्रा और सही तरीके से लिया गया प्रोटीन न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाता है, बल्कि कई बीमारियों से बचाव में भी अहम भूमिका निभाता है. आइए जानते हैं प्रोटीन से जुड़े उन बड़े मिथकों की सच्चाई जो अक्सर सच माने जाते हैं.

प्रोटीन क्यों है 'बेस्ट मेडिसिन'?

कोटा के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. साकेत का कहना है, प्रोटीन हमारे शरीर के बिल्डिंग ब्लॉक हैं. ये इम्यूनिटी, मसल्स और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं. पहले से किडनी डिजीज वाले मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर कम प्रोटीन लेना चाहिए. लेकिन जिन्हें कोई समस्या नहीं है, हर उन लोगों को सलाह पर प्रोटीन लेना चाहिए.

मिथक 1: प्रोटीन किडनी खराब करता है

डॉक्टर ने बताया कई लोग सोचते हैं कि ज्यादा प्रोटीन से किडनी डैमेज हो जाती हैं लेकिन ये पूरी तरह गलत है. उनका कहना है कि प्रोटीन की कमी से ही मसल्स कमजोर होते हैं जो किडनी पर बोझ डालते हैं. दरअसल, प्रोटीन की कमी होने पर मस्कल वेस्टिंग होने लगती है जो किडनी को डैमेज कर सकती है. 

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मस्कल वेस्टिंग एक ऐसी स्थिति है जिसमें मसल्स के फाइबर सिकुड़ जाते हैं और मसल्स मास और उनकी ताकत कम होने लगती है. जब मसल्स वेस्ट होते हैं तो नाइट्रोजन वेस्ट बढ़ता है. फिर किडनी ही इसे बाहर निकालने का काम करती है जिसके लिए उसे अधिक मेहनत करनी होती है. वहीं कम मसल्स शरीर में सूजन पैदा करते हैं और यह सूजन किडनी की फिल्टरिंग यूनिट्स (नेफ्रॉन) को नुकसान पहुंचा सकती है और धीरे-धीरे उनकी कार्यक्षमता घटा सकती है.

मिथक 2: दाल-रोटी से प्रोटीन काफी है

ये सबसे कॉमन गलती है. दाल-रोटी बेसिक प्रोटीन देती है लेकिन पूरी जरूरत पूरी नहीं करती. डॉक्टर ने सलाह दी कि आपको एक्स्ट्रा प्रोटीन डाइट में लेना ही चाहिए. इसके लिए दूध, पनीर, अंडा या प्लांट-बेस्ड ऑप्शन चुनें. शाकाहारी लोग प्रोटीन जरूरत पूरा करने के लिए वेजिटेरियन प्रोटीन सोर्स एड करें.

मिथक 3: प्रोटीन सिर्फ बॉडीबिल्डर्स के लिए

प्रोटीन हर किसी के लिए जरूरी है. ये इम्यून सिस्टम मजबूत करता है, इंजुरी से रिकवर कराता है, मसल्स गेन और वेट लॉस में मदद करता है. हड्डियों और ओवरऑल हीलिंग के लिए प्रोटीन काफी जरूरी है इसलिए महिलाओं, बच्चों और एल्डर्स को भी रोज प्रोटीन लेना चाहिए.

मिथक 4: प्रोटीन से वजन बढ़ता है

ये पूरी तरह से गलत है क्योंकि प्रोटीन से वजन नहीं बढ़ता बल्कि कार्ब और फैट प्रोटीन वजन बढ़ाते हैं. प्रोटीन सैटिएशन देता है यानी कि प्रोटीन खाने के बाद खाने की इच्छा कम होती है जिससे ओवरईटिंग रुकती है. वेट मैनेजमेंट के लिए प्रोटीन बेस्ट चॉइस है इसलिए प्रोटीन वाले फूड्स डाइट में जोड़ें.

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मिथक-5: प्रोटीन यूरिक एसिड बढ़ाता है

प्लांट प्रोटीन से यूरिक एसिड नहीं बढ़ता. हाइड्रेशन अच्छा रखें. एनिमल प्रोटीन और अल्कोहल से समस्या हो सकती है. यदि आप बैलेंस डाइट ले रहे हैं तो  प्रोटीन आपके लिए सेफ है.

मिथक 6: एक मील में प्रोटीन काफी

सिर्फ एक मील में प्रोटीन लेना जरूरी नहीं है बल्कि हर मील में आपको प्रोटीन लेना जरूरी है. दिन भर यदि आपकी बॉडी को प्रोटीन मिलेगा तो बैलेंस बना रहेगा. इसलिए हर मील में थोड़ा-थोड़ा प्रोटीन एड करें.

Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.

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