दिन में 100 बार पेशाब करने जाता था शख्स, सच जानने के बाद डॉक्टर भी घबराए

एक शख्स को पेशाब आपने की इतनी बड़ी समस्या थी कि वो दिन में करीब 100 बार टॉयलेट जाता था. बार-बार पेशाब आने की समस्या को डॉक्टरों ने सामान्य मानकर नजरअंदाज किया था लेकिन जब वह बेहोश होकर गिरा तब जांच में असल वजह सामने आई.

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सख्स को काफी गंभीर समस्या सामने आई थी. (Photo: ITG) सख्स को काफी गंभीर समस्या सामने आई थी. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

Frequent Urination: हमारी बॉडी पेशाब के द्वारा अंदर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है. इस कारण लोग सुबह उठने से रात के सोने तक लगभग 5 से 8 बार पेशाब करने जाते हैं. लेकिन एक आदमी ऐसा भी है जो दिन में करीब 100 बार यूरिनेशन के लिए जाता था. जब उसने डॉक्टर को दिखाया तो शुरुआत में डॉक्टरों ने इसे महज एक सामान्य यूरिन इंफेक्शन या लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या मानकर टाल दिया. लेकिन यह मामूली दिखने वाली दिक्कत एक बड़ी और जानलेवा बीमारी का संकेत थी जिसका खुलासा तब हुआ जब वह शख्स दर्द और कमजोरी के कारण बीच सड़क पर बेहोश हो गया. 

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क्या था पूरा मामला?

द मेट्रो की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के रहने वाले एडम मूर (Adam Moore) को शुरुआती परेशानी कई महीनों पहले शुरू हुई थी. उसने महसूस किया था कि वह नॉर्मल से अधिक बार बाथरूम जा रहा है जिसके कारण उसकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ पूरी तरह तबाह हो गई थी. वह कहीं भी बाहर जाने से डरने लगा था. हालत ये थी कि वे दिन में करीब 100 बार टॉयलेट जा रहे थे.

जब वह पहली बार डॉक्टर्स के पास पहुंचा तो उसे बताया गया कि ये ओवरएक्टिव ब्लैडर या कोई नॉर्मल साधारण इन्फेक्शन का मामला है. डॉक्टरों ने उसे कुछ दवाएं देकर घर भेज दिया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. सुधार की जगह हालात और बिगड़ते गए. एडम का वजन लगातार कम होने लगा और वे बार-बार बेहोश होने लगे.

जब बीच सड़क पर हो गया हादसा

एडम का कहना है कि एक दिन वह ऑफिस से लौट रहे थे कि अचानक उन्हें तेज चक्कर आए और वह बेहोश होकर गिर पड़े. जब उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट किया और जांच की गई तो एमआरआई स्कैन में सामने आया कि उनके ब्लैडर के पास एक ट्यूमर बन रहा था जो वहां की नसों पर दबाव डाल रहा था. इसी दबाव के कारण उसके दिमाग को बार-बार सिग्नल मिल रहा था कि उसका ब्लैडर भरा हुआ है और उसे पेशाब करने जाना पड़ रहा था.

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लापरवाही पड़ सकती थी भारी

अक्सर लोग शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को मामूली समझकर छोड़ देते हैं. इस शख्स के मामले में भी अगर सही समय पर स्कैनिंग की गई होती, तो उसे महीनों तक इस मानसिक और शारीरिक पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता.

फिलहाल सर्जरी के बाद मरीज की हालत में सुधार है और उसकी टॉयलेट जाने की फ्रीक्वेंसी अब सामान्य हो रही है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपको भी ऐसी कोई असामान्य समस्या महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज न करें और सेकंड ओपिनियन जरूर लें.

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