LPG संकट: दिल्ली-मुंबई के रेस्टोरेंट्स ने बटर चिकन और पनीर पर चलाई कैंची, जानें क्या है वजह

ईरान युद्ध की वजह से खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले LPG सिलेंडर की कमी ने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के रेस्टोरेंट को अपने मेन्यू में कटौती करने पर मजबूर कर दिया है. इस कड़ी में सबसे पहले गाज गिरी है ग्रेवी वाली डिशेज पर, हालांकि रेस्टोरेंट्स ने तंदूर में बनने वाली डिशेज पर कोई कटौती नहीं की है.

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LPG संकट के बीच रेस्टोरेंट्स में नहीं मिलेंगी ये डिशेज (Photo: AI generated) LPG संकट के बीच रेस्टोरेंट्स में नहीं मिलेंगी ये डिशेज (Photo: AI generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

हजारों किलोमीटर दूर ईरान में लड़ी जा रही लड़ाई चुपचाप पूरे भारत में PG और कोर्ट के रेस्टोरेंट और कैंटीन के मेन्यू को बदल रही है. होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से शिपमेंट में रुकावटों की वजह से खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले LPG की कमी ने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के रेस्टोरेंट को अपने मेन्यू में कटौती करने पर मजबूर कर दिया है. आपकी पसंदीदा ग्रेवी डिश जैसे बटर चिकन और छोले भटूरे जैसी तली हुई चीजें मेन्यू से बाहर होने लगी हैं. हालांकि तंदूर पर बनने वाली डिशेज इस कटौती से बच गई हैं.

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मेन्यू में क्यों हो रही है कटौती?

आप सोचेंगे कि यह भेदभाव क्यों? इसका जवाब स्वाद या किसी भेदभाव की वजह से नहीं बल्कि LPG या फ्यूल के इस्तेमाल की वजह से है. इसके पीछे एक कड़वी सच्चाई है कि भारत में 90% रेस्टोरेंट अपनी रसोई चलाने के लिए LPG सिलेंडर पर निर्भर हैं. बहुत कम ने PNG कनेक्टिविटी या इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम जैसे विकल्पों को अपनाया है.

मेन्यू में क्यों हो रही है कटौती?

गैस की कमी के चलते रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू को छोटा करना शुरू कर दिया है. सबसे ज्यादा असर उन डिशेज पर पड़ा है जिन्हें बनाने में ज्यादा गैस खर्च होती है.

ग्रेवी वाली डिशेज कम हो गईं
रेस्टोरेंट्स को कमर्शियल LPG सिलेंडर पाने में मुश्किल हो रही है इसलिए पहला बदलाव ग्रेवी वाली डिशेज में कटौती करना है, जो ज्यादातर गैस पर बनती हैं. इसके अलावा क्योंकि इन्हें धीरे-धीरे पकाया जाता है इसलिए इससे फ्यूल ज्यादा जलता है. यही बात छोले भटूरे जैसी तली हुई चीजों पर भी लागू होती है.

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हालांकि, दूसरी ओर तंदूरी चिकन, पनीर टिक्का, नान और कुलचा जैसी तंदूर वाली डिशेज मेन्यू में बनी हुई हैं.

डोसा जॉइंट्स पर खास तौर पर असर पड़ रहा है. उत्तपम और मसाला डोसा जैसी चीजों में बहुत ज्यादा फ्यूल लगता है क्योंकि इन डिशेज को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तवे को लगातार गर्मी की जरूरत होती है.

कई डोसा जॉइंट्स ने चावल और सांभर जैसे खाने परोसना शुरू कर दिया है जिनमें कम फ्यूल लगता है. कई छोटी रेस्टोरेंट्स ने अपनी सर्विस सिर्फ चाय और कॉफी तक सीमित कर दी है.

कैंटीन और हॉस्टल पर भी पड़ा असर
दिल्ली हाई कोर्ट की कैंटीन जो वकीलों के लिए एक पॉपुलर जगह है. वो भी LPG सिलेंडर की कमी से जूझ रही है. इस वजह से बिरयानी, दाल मखनी और शाही पनीर जैसे मेन कोर्स आइटम मेन्यू से हट गए हैं. कैंटीन की तरफ से जारी एक नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सिर्फ सैंडविच, सलाद और फ्रूट चाट ही मिलेंगे. यहां तक ​​कि मामूली समोसा भी फांसी पर चढ़ा दिया गया है.

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि आपको यह बताना है कि अभी LPG गैस सिलेंडर न होने की वजह से हमें दुख है कि हम वकीलों की कैंटीन में मेन कोर्स आइटम बना और सर्व नहीं कर पा रहे हैं. 

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