How much chicken should you eat: पिछले कुछ सालों में लोगों में अपनी सेहत को लेकर काफी अवेयरनेस बढ़ी है. इसके लिए लोग अपनी डाइट, एक्सरसाइज, लाइफस्टाइल सुधारने पर जोर दे रहे हैं. एक सबसे बड़ा बदलाव जो आया है वो है कि लोगों ने प्रोटीन इंटेक पर ध्यान देना शुरू किया है. ऐसे में फिटनेस फ्रीक लोग अंडे और चिकन का अधिक सेवन करते हैं. यदि आप भी जिम फ्रीक हैं या फिर 'चिकन लवर' है और आपकी डाइट का एक बड़ा हिस्सा चिकन पर निर्भर है तो यह खबर आपके लिए एक चेतावनी हो सकती है.
अभी तक सभी प्रोटीन के लिए अपनी जरूरत के मुताबिक चिकन खाते आ रहे हैं. अब भले ही उसकी मात्रा 200 ग्राम, 300 ग्राम या फिर 500 ग्राम प्रतिदिन हो. लेकिन रिसर्च दावा करती है कि अधिक चिकन खाने से आपको कुछ गंभीर समस्याएं हो सकती हैं और प्रोटीन का यह अच्छा सोर्स यानी चिकन आपको बीमार कर सकता है.
न्यूट्रिएंट्स जर्नल में पब्लिश इटली में हुई ऑब्जर्वेशनल स्टडी (2025) में दावा किया गया है कि एक हफ्ते में 300 ग्राम से अधिक व्हाइट मीट (चिकन, खरगोश, टर्की आदि) खाना आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
आमतौर पर सफेद मांस को सेहत के लिए अच्छा माना जाता है लेकिन इस स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों को पाचन तंत्र यानी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (GI) से जुड़े कैंसर हुए थे, वो सफेद मांस का सेवन अधिक कर रहे थे. उनके द्वारा खाए गए सफेद मांस में से 33 प्रतिशत हिस्सा पोल्ट्री (चिकन) का था. जीआई कैंसर पाचन तंत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट) से जुड़े कैंसर का समूह है, जिसमें भोजन नली, पेट, छोटी-बड़ी आंत, लीवर, अग्न्याशय और पित्ताशय शामिल होते हैं.
दरअसल, वैज्ञानिकों ने यह देखने की कोशिश कर रहे थे कि क्या चिकन, टर्की या बत्तख जैसे पक्षियों का मांस खाने से पेट के कैंसर और जल्दी मौत का कोई संबंध है? इसके लिए उन्होंने इटली के लगभग 4869 वयस्कों पर 19 सालों तक नजर रखी गई जिसमें पाया गया कि जिन लोगों की मौत पेट के कैंसर (जैसे लिवर, पेट और आंतों का कैंसर) की वजह से हुई थी उनमें सफेद मांस खाने की मात्रा सबसे ज्यादा देखी गई थी.
रिसर्च में सामने आया कि जो लोग हफ्ते में 300 ग्राम से अधिक व्हाइट मीट खाते हैं, उनमें किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु का खतरा हफ्ते में 100 ग्राम कम चिकन खाने वाले लोगों की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक हो जाता है.
पुरुषों में ये खतरा और बढ़कर 61 प्रतिशत हो गया था यानी 100 ग्राम से अधिक चिकन खाने वाले पुरुषों की समय से पहले मौत का रिस्क लगभग डेढ़ गुना हो गया था.
100-200 ग्राम चिकन प्रति सप्ताह लेने वाले लोगों में जीआई कैंसर से मौत का रिस्क 65 प्रतिशत अधिक दिखा जबकि 300 ग्राम से अधिक पोल्ट्री खाते थे, उनमें पाचन तंत्र से संबंधिक कैंसर से मरने की संभावना 127 प्रतिशत अधिक थी और पुरुषों के लिए यह जोखिम और भी अधिक यानी 161 प्रतिशत था.
स्टडी टीम का साफ कहना है कि जितना कम पोल्ट्री का सेवन हो, उतना अच्छा है. रिसर्चर्स का कहना है ये एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है यानी ये व्हाइट मीट और बीमारियों से संबंध दिखाती है, सीधे-सीधे परिणाम साबित नहीं करती. परिणामों को अच्छे से समझने के लिए और आगे अधिक रिसर्च की जरूरत है.
Healthline के मुताबिक, अमेरिकी डाइट्री गाइडलाइंस 2020‑2025 के मुताबिक, 2,000 कैलोरी वाली डाइट में हफ्ते में लगभग 740 ग्राम प्रोटीन वाली चीजें जैसे लीन मीट, पोल्ट्री और एग्स शामिल करने की सलाह दी गई थी जिसमें सिर्फ चिकन की अलग से लिमिट तय नहीं थी. इसका मतलब अभी तक ऑफिशियल गाइडलाइंस चिकन को हेल्दी लीन प्रोटीन मानती रही हैं, खासकर रेड और प्रोसेस्ड मीट की जगह.
नई स्टडी का कहना है कि कुल पोल्ट्री का सेवन 300 ग्राम प्रति सप्ताह के नीचे रखना बेहतर हो सकता है और 100 ग्राम प्रति सप्ताह से कम रखना तो और भी सुरक्षित होगा.
Healthline से बात करते हुए ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. एंटन बिलचिक ने इस स्टडी को 'अलार्मिंग' बताया और कहा कि अब पहली बार ऐसा लग रहा है कि व्हाइट मीट, खासकर पोल्ट्री, जीआई कैंसर के रिस्क फैक्टर के तौर पर सीरियसली लिया जाना चाहिए.
कार्डियोवैस्कुलर डाइटिशियन मिशेल रुथेनस्टीन भी मानती हैं कि पोल्ट्री रेड मीट की तुलना में कम सैचुरेटेड फैट और कम TMAO पैदा करती है, लेकिन साथ ही वो ये भी कहती हैं कि इस स्टडी के परिणामों को समझने के लिए और रिसर्च जरूरी है, इससे पहले कि गाइडलाइंस बदलें.
यानी, फिलहाल एक्सपर्ट्स चिकन को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे, लेकिन चिकन की ओवर ईटिंग से सावधान जरूर कर रहे हैं.
दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन एंड न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. दिव्या मलिक ने Aajtak.in को बताया, 'चिकन को अक्सर लोग हेल्दी समझकर जरूरत से अधिक मात्रा में खाने लगते हैं, जो सही नहीं है. हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों से साफ होता है कि अत्यधिक चिकन सेवन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. चिकन को 'डेली डाइट' नहीं बल्कि 'बैलेंस्ड डाइट का एक हिस्सा' माना जाना चाहिए.'
'किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक दिन में 50–60 ग्राम से अधिक चिकन नहीं खाना चाहिए और हफ्ते में 300 ग्राम से कम चिकन सुरक्षित सीमा मानी जाती है. अधिक मात्रा लेने पर शरीर में प्रोटीन का असंतुलन हो सकता है और आंतों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. आज के समय में प्लांट-बेस्ड डाइट बेहद जरूरी है. दालें, बीन्स, सोया, फल, सब्जियां और साबुत अनाज न सिर्फ बेहतर पोषण देते हैं बल्कि कैंसर और हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों से बचाव में भी मदद करते हैं. हेल्दी रहने के लिए सिर्फ चिकन पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं है, बल्कि विविध और संतुलित आहार ही असली समाधान है.'
डॉ. दिव्या का कहना है, 'जो लोग नियमित रूप से जिम, वर्कआउट या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उनके लिए चिकन एक अच्छा प्रोटीन सोर्स माना जाता है लेकिन इसकी मात्रा संतुलित होना बेहद जरूरी है. एक्सरसाइज़ करने वालों को मसल रिकवरी और स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए प्रोटीन की जरूरत अधिक होती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वो कितना भी चिकन खाएं.'
'वर्कआउट करने वाले व्यक्ति के लिए एक दिन में 100-120 ग्राम से अधिक चिकन नहीं खाना चाहिए और हर हफ्ते इसकी मात्रा 300 से 350 ग्राम से अधिक नहीं खाना चाहिए. हालिया स्टडीज़ यह भी इशारा करती हैं कि जरूरत से ज़्यादा चिकन खाने से लंबे समय में पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है और कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है इसलिए वर्कआउट करने वालों को सलाह दी जाती है कि वे चिकन के साथ-साथ दालें, पनीर, अंडा, नट्स और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन को भी अपनी डाइट में शामिल करें.'
'साथ ही चिकन पकाने का तरीका भी अहम है. डीप फ्राई या ज़्यादा मसालेदार चिकन की जगह उबला हुआ, ग्रिल्ड या स्टीम्ड चिकन बेहतर विकल्प माना जाता है. सही मात्रा और सही तरीके से लिया गया चिकन ही फिटनेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.'
जो लोग एक्सरसाइज या फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते, उनके लिए ज़्यादा चिकन खाना जरूरी नहीं है क्योंकि यह उनके लिए नुकसानदेह भी हो सकता है. बिना वर्कआउट के अधिक प्रोटीन लेने से शरीर उसे सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं, फैट जमा होना और मेटाबॉलिक असंतुलन हो सकता है.'
'ऐसे लोगों को एक दिन में 30-40 ग्राम से अधिक चिकन नहीं लेना चाहिए और हफ्ते में 125 से 150 ग्राम से अधिक चिकन नहीं लेना चाहिए. नॉन-वर्कआउट करने वालों को प्रोटीन की जरूरत सीमित होती है जिसे दाल, सब्ज़ी, दूध, दही और फल-सब्जियों से आसानी से पूरा किया जा सकता है.'
बेंगलुरु के स्पर्श हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. ईश्वर अमलजारी के मुताबिक, 'अधिक मात्रा में चिकन खाने का सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है. आंतों की सेहत बनाए रखने के लिए फाइबर-युक्त भोजन बेहद ज़रूरी है जो फल, सब्ज़ी और साबुत अनाज से मिलता है. सिर्फ प्रोटीन-हैवी डाइट आंतों के माइक्रोबायोम को नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए चिकन का सेवन सीमित रखें, संतुलित आहार लें और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में वैरायटी रखें.'
Disclaimer: यह आर्टिकल रिसर्च और डॉक्टर्स द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.
मृदुल राजपूत