1 पैर पर खड़े होकर जानें सेहत, इतने सेकंड नहीं खड़े हो पाए तो खतरे में फिटनेस

क्या आप जानते हैं कि एक पैर पर खड़ा होना आपकी उम्र और सेहत का राज खोल सकता है? रिसर्च के मुताबिक, बिना किसी सहारे के एक पैर पर टिके रहने की क्षमता यह बताती है कि आप कितनी स्वस्थ तरीके से उम्र के अगले पड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं.

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1 पैर पर खड़े होकर पता कर सकते हैं कि कितने फिट हैं आप. (Photo: ITG) 1 पैर पर खड़े होकर पता कर सकते हैं कि कितने फिट हैं आप. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:46 PM IST

अक्सर लोग किसी की फिटनेस को उसकी फिजिक, 6 पैक एब्स, चौड़ा सीना आदि देखकर तय करते हैं. लेकिन साइंस कहता है कि आपकी सेहत का सबसे सटीक पैमाना आपके शरीर का संतुलन यानी बैलेंस है. मेयो क्लिनिक और अन्य रिसर्च इंस्टीट्यूट्स की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि एक व्यक्ति कितनी देर तक एक पैर पर खड़ा रह सकता है, यह उसकी न्यूरोमस्कुलर एजिंग (नसों और मसल्स के बूढ़े होने की स्पीड) का सबसे बड़ा संकेतक है. अगर आप अपनी उम्र के हिसाब से तय किए गए समय तक बैलेंस नहीं बना पा रहे हैं तो ये आपकी फिटनेस पर सवाल उठा सकता है और भविष्य में गिरने, चोट लगने या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है.

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किस उम्र में कितनी देर खड़े रहना है जरूरी?

रिपोर्ट में उम्र के हिसाब से कुछ मानक तय किए गए हैं. जैसे अगर आपकी उम्र 18 से 39 साल के बीच है तो आपको कम से कम 43 सेकंड तक एक पैर पर खड़ा होना चाहिए. वहीं, 40 से 49 साल वालों के लिए यह समय 40 सेकंड है. 

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है तो यह क्षमता कम होने लगती है इसलिए 50 से 59 साल के लोगों के लिए 37 सेकंड, 60 से 69 साल के लिए 30 सेकंड और 70 से 79 साल के बुजुर्गों के लिए 18 से 19 सेकंड का समय अच्छा माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति 80 साल से ऊपर है और वह 5 सेकंड भी बिना सहारे खड़ा रहता है तो उसकी स्थिति संतोषजनक मानी जाती है.

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10 सेकंड का वो खतरनाक इशारा

ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में पब्लिश्ड एक स्टडी तो और भी हैरान करने वाली है. इसमें बताया गया है कि मध्य आयु या बुजुर्ग अवस्था में जो लोग कम से कम 10 सेकंड तक एक पैर पर नहीं खड़े हो पाते उनमें अगले 10 सालों में मृत्यु का जोखिम उन लोगों की तुलना में लगभग दोगुना हो जाता है जो इस टेस्ट को पास कर लेते हैं. रिसर्चर्स का मानना है कि खराब संतुलन सीधे तौर पर गिरकर लगने वाली गंभीर चोटों, कमजोर हड्डियों और यहां तक कि दिल की बीमारियों से जुड़ा हो सकता है.

मसल्स से ज्यादा जरूरी है नसों की मजबूती

वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारी चलने की गति या हाथों की पकड़ की तुलना में संतुलन कहीं तेजी से गिरता है. संतुलन बनाए रखने के लिए हमारे दिमाग, नजर और शरीर की नसों के बीच एक बेहतरीन तालमेल की जरूरत होती है. अच्छी बात यह है कि इसे सुधारा जा सकता है. रोजाना एक पैर पर खड़े होने का अभ्यास करने से न केवल आपका संतुलन बेहतर होता है, बल्कि यह आपके दिमाग को भी सक्रिय रखता है. 

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