इस तरह जीने वाले लोगों को जल्दी घेर लेता है बुढ़ापा, घट जाती है उम्र

अकेलापन इंसान की उम्र को एक साल आठ महीने यानि लगभग दो साल आगे कर देता है. ये धूम्रपान से भी तेजी से व्यक्ति को बूढ़ा करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अकेलापन शारीरिक और मानसिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ाता है. आंकड़ों के मुताबिक, भारत में लगभग 50 लाख लोग अकेलेपन का शिकार हैं जिनमें ज्यादातर लोग शहरी इलाकों में रहते हैं.

Advertisement
अकेलापन बुलाता है बुढ़ापा अकेलापन बुलाता है बुढ़ापा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

दुनिया में लगातार विकसित होती तकनीक की वजह से करोड़ों मील दूर लोग भी आपस में एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं. हम दुनिया के दूसरे कोने में बैठे किसी भी शख्स से बात कर सकते हैं, उसे देख सकते हैं. हम सभी अपने परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों के साथ भी आसानी से संपर्क कर पाते हैं लेकिन ये सिक्के का सिर्फ एक पहलू है. दूसरा पहलू ये है कि तमाम तरह की तकनीकों के बावजूद लोग अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं. कई लोग मजबूरी और तो कई अपनी इच्छा के अनुसार खुद को लोगों से दूर कर लेते हैं जो इंसानी प्रकृति के विपरीत है. यही वजह है कि अकेले रहने वाले लोग अवसाद, तनाव, हृदय रोग, डाइमेंशिया जैसी कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. वहीं, एक नई रिसर्च में सामने आया है कि अकेलापन इंसान को समय से पहले ही बूढ़ा बना देता है और ये सेहत को धूम्रपान से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. 

Advertisement

रिसर्च में हुआ ये चौंकाने वाला खुलासा
इस रिसर्च में ये दावा किया गया है कि अकेलापन इंसान को एक साल आठ महीने यानि लगभग दो साल आगे कर देता है जिससे वो हमउम्र लोगों की तुलना में जल्दी बूढ़े होते हैं और ये धूम्रपान से भी तेजी से उम्र बढ़ाता है. धूम्रपान करने वाले लोगों की उम्र हमउम्र लोगों की तुलना में एक साल तीन महीने जल्दी बढ़ती है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि अकेलापन कई अन्य बीमारियों के साथ ही शरीर में सूजन भी बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति की अल्जाइमर समेत कई बीमारियों से घिरने की आशंका बढ़ जाती है.

भारत में लगभग 50 लाख लोग अकेलेपन का शिकार हैं जिनमें ज्यादातर लोग शहरी इलाकों में रहते हैं. वहीं, एक वैश्विक सर्वेक्षण में दावा किया गया कि दुनिया की 33 प्रतिशत आबादी अकेलेपन से पीड़ित है.

Advertisement

अकेलेपन से हेल्थ पर पड़ता है बुरा असर

वैज्ञानिकों का कहना है कि अकेलापन और लोगों से दूरी इंसान का स्वास्थ्य खराब करती है. आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन कई रिसर्च में सामने आया है कि अकेलेपन से शरीर में सूजन बढ़ती है. दरअसल सूजन तब होती है जब शरीर संक्रमण या कोई चोट लगने पर उससे लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को रसायनों का उत्पादन करने का सिग्नल देता है और ऐसा तनाव और अवसाद की स्थिति में भी होता है जिससे शरीर में सूजन हो जाती है. 

शोध से पता चलता है कि शरीर की बायलॉजिकल क्लॉक बिगड़ने पर इंसान में अल्जाइमर, डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अकेलेपन और उदासी की वजह से लंबे समय तक शरीर में होने वाली सूजन कोशिकाओं और महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाती है.

अमेरिका की हावर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी बताती है कि अमेरिका में एक तिहाई लोग गंभीर रूप से अकेलेपन का शिकार हैं. जबकि हर साल आठ फीसदी लोग गंभीर स्तर के अवसाद का शिकार होते हैं.  

कई और रिसर्च में भी ऐसा दावा किया गया

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लौरी थीके कहती हैं, ''मैं 2002 से इस पर रिसर्च कर रही हूं और जो रिजल्ट्स मैंने देखे, उनमें अकेलापन इंसान की उम्र कम करता है, उसके जल्दी मरने की आशंका बढ़ती है और एक साथ कई बीमारियों का शिकार होने का खतरा रहता है इसलिए मेरे लिए ये निष्कर्ष नए नहीं हैं. दरअसल अकेले रहने वाले लोगों में बाकी की तुलना में शरीर में होने और तनाव से घिरने का जोखिम होता है. ऐसे लोगों की जीवनशैली भी कम सक्रिय होती है और इन दोनों वजहों से सेहत और खराब हो जाती है.'

Advertisement

कोई कितने साल तक जीवित रहेगा,  इसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है. लेकिन हर किसी की एक बायोलॉजिकल एज भी होती है जिसका इंसान के खून, किडनी, दिल और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है.

रिसर्च में क्या मिला

कैलिफोर्निया में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और हांगकांग की एक कंपनी डीप लॉन्गविटी के शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च के लिए चीन के 12,000 लोगों के डेटा का आकलन किया जिनमें कुछ लोग 45 से 64 साल, कुछ लोग उससे ऊपर और लगभग एक तिहाई लोग वो थे जो फेफड़े, कैंसर और स्ट्रोक या किसी बीमारी से पीड़ित थे. 

खून के नमूनों, सर्वेक्षणों और चिकित्सीय डेटा का उपयोग करते हुए विशेषज्ञों ने रिसर्च में शामिल लोगों की बायोलॉजिकल एज का अनुमान लगाने के लिए एक मॉडल तैयार किया था. इसके बाद उम्र बढ़ाने वाले फैक्टर्स का लोगों की उम्र, जेंडर और हेल्थ के आधार पर आकलन किया गया. साथ ही ये पता किया गया कि किन आधार पर लोगों की उम्र तेजी से बढ़ती है.

इस रिसर्च में टीम ने पाया कि अकेलापन और उदासी लोगों की बायोलॉजिकल एज सबसे तेजी से घटाती है. इससे उनकी हेल्थ खराब होती है और वो तेजी से बुढ़ापे का शिकार होते हैं.

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement