वेट लॉस, डिटॉक्स और कूलिंग के कारण कई लोग सुबह-सुबह खाली पेट लौकी के जूस का सेवन करते हैं. वहीं खाली पेट लौकी का जूस आजकल फिटनेस और हेल्थ इंफ्लूएंसर्स के बीच भी काफी पॉपुलर हो चुका है. न्यूट्रिशन वेबसाइट्स के मुताबिक, सही तरह से बना लौकी जूस पाचन बेहतर करने, कब्ज कम करने, वेट मैनेजमेंट और ब्लड प्रेशर कंट्रोल आदि में मदद कर सकता है. लेकिन दूसरी ओर कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगर लौकी या उसका जूस कड़वा हो तो वो सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है और शारीरिक समस्याएं पैदा कर सकती है. अब ऐसे में सवाल है कि खाली पेट लौकी का जूस पिएं या नहीं या फिर कौन-कौन सी सावधानी रखें.इस बारे में भी जान लीजिए.
के मुताबिक, अगर लौकी ताजी, हरी, बिना धब्बों वाली और स्वाद में मीठी हो तो उसका जूस सुबह खाली पेट लेना डाइजेशन के लिए अच्छा माना जा सकता है.
और अन्य न्यूट्रिशन साइट्स के डेटा के अनुसार, 100 ml लौकी जूस में लगभग 15 कैलोरी, बहुत कम फैट, हल्का फाइबर और पोटैशियम व विटामिन C जैसे न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं, जो दिन की शुरुआत हल्की रखने में मदद कर सकते हैं. खाली पेट लौकी जूस लेने से बाउल मूवमेंट स्मूद हो सकते हैं, एसिडिटी और हार्टबर्न कम हो सकता है और पेट हल्का महसूस होता है, बस शर्त ये है कि लौकी जूस फ्रेश और कड़वा ना हो.
में पब्लिश केस सीरीज़ और में कड़वे लौकी जूस से जुड़ी गंभीर फूड पॉइजनिंग के केस दर्ज हैं, जिनमें उल्टी, तेज पेट दर्द, ब्लडी वॉमिटिंग, लो ब्लड प्रेशर और मल्टी-ऑर्गन डैमेज तक देखा गया. ICMR और एक्सपर्ट कमेटी की साफ सलाह है कि अगर लौकी या उसका जूस जरा भी कड़वा लगे तो उसे तुरंत फेंक दें और अगर पीने के बाद घबराहट, मतली, उल्टी या दस्त जैसे लक्षण दिखें तो देर किए बिना अस्पताल पहुंचें.
के मुताबिक, लौकी के जूस की सबसे बड़ी खासियत उसका हाई वॉटर और फाइबर कंटेंट है जो बाउल मूवमेंट को रेग्युलेट करने और कब्ज कम करने में मदद कर सकता है. आयुर्वेदिक और होलिस्टिक न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स इसे कूलिंग और स्टमक-फ्रेंडली वेजिटेबल बताते हैं जो एसिडिटी, ब्लोटिंग और पेट के भारीपन जैसी दिक्कतों को कम करने में सपोर्ट कर सकती है, खासकर जब इसे सुबह छोटी मात्रा में लिया जाए.
के मुताबिक, लौकी जूस के जूस की लो-कैलोरी और हाई-वॉल्यूम नेचर इसे वेट लॉस डाइट के लिए अच्छा सपोर्ट ड्रिंक बनाती है. इसे पीने के बाद पेट भरा हुआ लगता है और अनहेल्दी स्नैकिंग की क्रेविंग कम होती है. कुछ रिव्यूज बताते हैं कि लौकी जूस पोटैशियम और फाइबर की वजह से ब्लड प्रेशर बैलेंस, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल और हार्ट हेल्थ के लिए भी सपोर्टिव हो सकता है हालांकि ये सारे फायदे तभी काम करते हैं जब ओवरऑल डाइट, नींद और एक्टिविटी लेवल भी बेहतर हों.
और कुछ हॉस्पिटल ब्लॉग्स आमतौर पर यह सुझाव देते हैं कि हेल्दी एडल्ट के लिए दिन में 100–200 ml (लगभग आधा से एक छोटा ग्लास) ताजा लौकी जूस पर्याप्त है.
से जुड़े केस पेपर्स में यह भी सामने आया है कि कड़वे लौकी जूस की कम मात्रा (करीब 50 ml के आस-पास) से भी गंभीर टॉक्सिसिटी के केस दर्ज हुए हैं और 300 ml जैसी हाई डोज कुछ केसों में गंभीर लंक्षण देखे गए हैं इसलिए लौकी के जूस की क्वालिटी भी अच्छी होनी जरूरी है.
प्रैक्टिकल लेवल पर कई एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि शुरुआत 50–100 ml से करें, शरीर की टॉलरेंस देखें और तभी 150–200 ml तक जाएं, वह भी दिन में सिर्फ एक बार. डायबिटीज, किडनी डिजीज, हार्ट पेशेंट या प्रेग्नेंट वूमन के लिए बेहतर है कि लौकी जूस को डेली रूटीन में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटीशियन से सलाह लें.
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य रिसर्च और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है. इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या इलाज का ऑपशंस न समझें.)
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क