गर्मियों में आइसक्रीम खाने का मजा ही अलग होता है. ये धूप के चिलचिलाती गर्मी से तुरंत राहत देने का काम करती हैं और स्वाद के मामले में भी बेहतरीन होती हैं. कोई चॉकलेट फ्लेवर पसंद करता है तो किसी को वनीला या स्ट्रॉबेरी खाने का मन करता है. इन्हें बनाने और जमाने में बर्फ से लेकर फ्रीजर और मशीन तक की जरूरत पड़ती है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी आइसक्रीम के बारे में सुना है, जो बिना बर्फ, बिना फ्रीजर और बिना मशीन के बनाई जाती हो? सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन हिमाचल प्रदेश में बनने वाली ट्रेडिशनल मलाई बरफ बिल्कुल ऐसी ही खास आइसक्रीम है.
नाम सुनकर लगता है कि इसमें खूब बर्फ होगी, लेकिन असलियत बिल्कुल उलट है. ये अनोखी देसी आइसक्रीम सिर्फ भैंस के दूध से और फ्रीजर में डालकर नहीं बल्कि लकड़ी की धीमी आंच पर तैयार की जाती है. यही वजह है कि लोग इसे 'आग से बनी आइसक्रीम' भी कहते हैं. खास बात ये है कि इसमें किसी तरह के आर्टिफिशियल फ्लेवर का इस्तेमाल भी नहीं होता.
घंटों तक लकड़ी की आंच पर पकता है दूध
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मलाई बरफ बनाने के लिए गाढ़े और मलाईदार भैंस के दूध को बड़े लोहे की कड़ाही में डालकर लकड़ी की धीमी आंच पर कई घंटों तक पकाया जाता है. इस दौरान दुकानदार लगातार दूध को चलाते रहते हैं और ऊपर जमने वाली मलाई को किनारों से खुरचते रहते हैं, ताकि दूध जले नहीं और उसका टेक्शचर स्मूद बना रहे.
धीरे-धीरे दूध का पानी पक जाता है और सिर्फ गाढ़ी मलाई बचती है. इसका टेक्शचर बिल्कुल क्रीमी और दानेदार हो जाता है. इसका स्वाद साधारण रबड़ी या खोए से बिल्कुल अलग होता है. धीरे-धीरे पकाए जाने की वजह से इसका स्वाद हल्का कैरामेल जैसा और बेहद रिच हो जाता है. इसमें से बहुत अच्छी खुशबू आती है और बेहद रिच फ्लेवर आता है, जो लंबे समय तक मुंह में बना रहता है.
बिना बर्फ के भी क्यों लगता है ठंडा?
मलाई बरफ की सबसे खास बात यही है कि इसमें बर्फ नहीं होती, फिर भी इसे खाने पर ठंडक महसूस होती है. दरअसल, लंबे समय तक पकने की वजह से दूध इतना गाढ़ा और क्रीमी हो जाता है कि खाने पर उसका टेक्शचर फ्रोजन कस्टर्ड जैसा लगता है. पहाड़ी इलाकों का ठंडा मौसम भी इसमें मदद करता है. यही वजह है कि बिना फ्रीजर के भी ये आइसक्रीम काफी देर तक अपनी शेप बनी रहती है.
दानेदार टेक्शचर बनाता है इसे खास
मलाई बरफ का टेक्शचर हल्का दानेदार होता है. ये दाने दूध के सॉलिड्स से बनते हैं, जो लंबे समय तक पकने के दौरान आपस में जुड़ जाते हैं. यही दानेदारपन इसे बाजार की स्मूद आइसक्रीम से बिल्कुल अलग और ज्यादा देसी स्वाद देता है.
पत्तों की प्लेट में होती है सर्व
इस मिठाई को बाजार में मिलने वाली आइसक्रीम की तरह कोन या फिर किसी फैंसी कप में सर्व नहीं किया जाता है. इसे बिल्कुल ट्रेडिशनल तरीके से पत्तों की प्लेट में परोसा जाता है. कई जगहों पर साल या बरगद के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ दुकानदार इसमें हल्का सा इलायची पाउडर, केसर या चीनी भी मिलाते हैं, लेकिन इसका असली स्वाद दूध की नेचुरल मलाई और लकड़ी की आंच से आता है.
घर पर कैसे बनाएं मलाई बरफ?
इंग्रेडिएंट्स:
बनाने का तरीका
1. सबसे पहले एक भारी तले वाले बर्तन में दूध डालें. अब इसे मीडियम आंच पर उबालें. बीच-बीच में चलाते रहें ताकि ऊपर मलाई की मोटी परत न जमे और दूध नीचे से जले नहीं.
2. जब दूध उबलने लगे, तो आंच धीमी कर दें. इस स्टेज पर दूध को लगातार चलाते हुए पकाना है. बर्तन के किनारों पर जो मलाई चिपके, उसे खुरचकर वापस दूध में मिलाते रहें. इससे मलाई बरफ ज्यादा स्वादिष्ट बनेगी.
3. करीब 45 मिनट से 1 घंटे में दूध गाढ़ा होकर लगभग एक-तिहाई रह जाएगा. अब इसमें चीनी, इलायची और गुनगुने दूध में भीगा हुआ केसर डाल दें.
4. इसे 10-15 मिनट और पकाएं, जब तक मिश्रण हल्का सुनहरा और काफी गाढ़ा न हो जाए. अब गैस बंद करें और इसे रूम टेंपरेचर पर ठंडा होने दें. तुरंत फ्रिज में न रखें. अगर थोड़ा ज्यादा सख्त टेक्शचर चाहिए, तो एक घंटे के लिए फ्रिज में रख सकते हैं.
5. बस आपकी मलाई बरफ तैयार है. को कटोरी या पत्तों की प्लेट में डालकर ऊपर से पिस्ता-बादाम से सजाकर सर्व करें.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क