जब भी शाम को चाय के साथ कुछ चटपटा खाने का मन करता है तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले समोसे का नाम आता है. लेकिन इस कॉम्बिनेशन में जान डालने का काम समोसे के अंदर भरा आलू का चटपटा मसाला करता है. समोसा खाने का असली मजा तभी आता है, जब उसमें आलू का चटपटा मसाला भरा हो. ऐसे में बिना आलू समोसा अधूरा सा लगता है, लेकिन अगर हम आपको एक ऐसे समोसे के बारे में सोचिए जिसमें आलू न भरा हो तो आपको कैसा लगेगा? शायद अजीब, लेकिन ऐसा समोसा होता था.
जिस समोसे के साथ आलू का रिश्ता आज 'अटूट' लगता है, वो कभी एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे? जी हां, जिस दौर में राजा-महाराजाओं की थाली सजती थी, वहां समोसा तो था लेकिन उसके अंदर आलू गायब था. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही समोसे की 500 साल पुरानी एक रेसिपी ने इतिहास के पन्नों को फिर से खोल दिया है. चलिए, आज आपको स्वाद की उस शाही गलियारे में ले चलते हैं, जहां समोसे का रूप और स्वाद दोनों ही आज से बिलकुल जुदा थे फिर समोसा 'रॉयल' हुआ करता था.
कहां से मिली 500 साल पुरानी रेसिपी?
क्या आप जानते हैं कि करीब 500 साल पहले समोसा बिल्कुल अलग अंदाज में बनाया जाता था? हाल ही में एक पुरानी रेसिपी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसने सबको हैरान कर दिया है. इस रेसिपी में समोसे के अंदर न तो आलू है और न ही मिर्च, फिर भी ये समोसा राजा-महाराजाओं की पहली पसंद हुआ करता था.
समोसे की ये रॉयल और अनोखी रेसिपी हाल ही में इतिहासकार डॉ. एम.एफ. खान ने एक्स (X) पर शेयर की है. उन्होंने अपने पोस्ट में एक बहुत रेयर फारसी पांडुलिपि (मैनुस्क्रिप्ट) निमतनामा (Ni'matnama) का जिक्र किया है, जिसे 'स्वादों की किताब' के नाम से भी जाना जाता है. ये साल 1501 से 1510 के बीच मध्य भारत के मांडू (मध्य प्रदेश) के सुल्तान के लिए लिखी गई थी.
दिलचस्प बात ये है कि स्वाद का ये खजाना समय के साथ कई महान शासकों के हाथों से होकर गुजरा है. 'निमतनामा' कभी मुगल सम्राट अकबर के पुस्तकालय की भी शान थी, तो कभी ये टीपू सुल्तान के खजाने का हिस्सा रही. ब्रिटिश काल के दौरान ये ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए लंदन पहुंची और आज ये ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है, जो 500 साल पुराने भारत की शाही रसोइयों में परोसे जाने वाली रेसिपी की याद दिलाती है.
किन चीजों से बनता था शाही समोसा?
इस 'स्वादों की किताब' में 'रॉयल समोसे' की रेसिपी है, जो आज के समोसे से बिल्कुल जुदा है. आज के दौर के समोसे में जहां आलू और मसाले डाले जाते हैं, वहीं उस समय ऐसा कुछ नहीं था. इसके पीछे कहानी ये है कि आलू और मिर्च भारत में बाद में आए थे, इसलिए पुराने समोसे में इनका इस्तेमाल नहीं होता था.
उस दौर के समोसे में ये खास चीजें डाली जाती थीं:
इन सभी चीजों को मिलाकर समोसे में भरा जाता था और फिर उसे घी में तला जाता था. आपको जानकर हैरानी होगी कि रॉयल समोसे की फिलिंग ही नहीं बल्कि उसका आटा भी आज के समोसे से बहुत अलग हुआ करता था. आज के समय में जहां समोसा बनाने के लिए मैदा का इस्तेमाल होता है, लेकिन बताया जाता है उस समय तीन तरह के आटे इस्तेमाल किए जाते थे मोटा आटा, बारीक आटा
या बिना पका हुआ आटा.
बनाने का तरीका
1. इतिहासकार डॉ. एम.एफ. खान के मुताबिक, समोसा बनाने के लिए पके हुए कीमे में बराबर मात्रा में बारीक कटा प्याज मिलाया जाता था.
2. इसके बाद इसमें थोड़ा सा सूखा अदरक और उससे थोड़ा ज्यादा पिसा हुआ लहसुन डाला जाता था. फिर केसर को गुलाब जल में घोलकर इस मिश्रण में मिलाते थे और साथ में बैंगन का गूदा भी डाल देते थे.
3. अब इस तैयार मसाले को आटे में भरकर घी में तला जाता था. आपका रॉयल समोसा तैयार हो जाता था.
आज के समय में समोसा एक नॉर्मल स्ट्रीट फूड बन चुका है, लेकिन 15वीं सदी में ये शाही रसोई का हिस्सा हुआ करता था. इसे खास मौकों पर बनाया जाता था और इसका स्वाद आज के समोसे से बिल्कुल अलग होता था. लेकिन समय के साथ समोसे की रेसिपी बदलती गई. आलू, मिर्च और आसान मसालों ने इसे आम लोगों का पसंदीदा नाश्ता बना दिया.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क