गेहूं-जौ में मौजूद ग्लूटेन से सेहत को खतरा, कब करना चाहिए इससे परहेज?

'हेल्दी लिविंग विद शरण' के साथ बतौर हॉलिस्टिक हेल्थ कोच के रूप में काम कर रहीं शर्मिला कन्नन ने इसे लेकर बेहद अहम जानकारी दी है. एक्सपर्ट ने बताया कि ग्लाइडिन हमारी छोटी आंत में जाकर उसकी म्यूकोसा लाइनिंग को खराब करता है.

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गेंहूं-जौं में मौजूद ग्लूटेन सेहत के लिए खतरना? जानें कब करना चाहिए इससे परहेज गेंहूं-जौं में मौजूद ग्लूटेन सेहत के लिए खतरना? जानें कब करना चाहिए इससे परहेज

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST
  • ग्लाइडिन से हमारे शरीर को कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं
  • ग्लाइडिन छोटी आंत की म्यूकोसा लाइनिंग को खराब कर देता है

गेहूं, जौ और जई जैसे अनाज में ग्लूटेन नाम का एक प्रोटीन होता है. इस प्रोटीन में कई तरह के तत्व पाए जाते हैं. इसमें ग्लाइडिन नाम का भी एक तत्व होता है, जो कुछ लोगों के शरीर को नुकसान पहुंचाता है. 'हेल्दी लिविंग विद शरण' के साथ बतौर हॉलिस्टिक हेल्थ कोच के रूप में काम कर रहीं शर्मिला कन्नन ने इसे लेकर बेहद अहम जानकारी दी है. एक्सपर्ट ने बताया कि ग्लाइडिन हमारी छोटी आंत में जाकर उसकी म्यूकोसा लाइनिंग को खराब कर देता है.

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हमारे फिट तक चैनल के माध्यम से शर्मिला कन्नन ने बताया कि ग्लाइडिन की वजह से हमें व्हीट एलेर्जी, ग्लूटेन इंटॉलरेंस और सीलिएक डिसीज जैसी समस्या हो सकती है. इसमें कई तरह के लक्षण देखने को मिल सकते हैं. कद का न बढ़ना, शरीर का वजन न बढ़ना, त्वचा संबंधी रोग, खून की कमी, हड्डियों की कमजोरी, माइग्रेन या फिर पेट का फूलना, पेट में गैस, दस्त या कब्ज की समस्या हो सकती है. हालांकि ये सभी लक्षण कई और वजहों से भी देखने को मिलते हैं.

इन रोगों से घिरा पाकर डॉक्टर आपको अनाज से परहेज करने की सलाह दे सकते हैं. ऐसे में आप ग्लूटेन फ्री डाइट का सहारा ले सकते हैं. इसमें ज्वार, बाजरा, कंगनी, नचनी, सामक के चावल और चौलाई के आटे का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इनसे आपके खाने की सभी जरूरतें पूरी हो सकती हैं. आप रोटी, उपमा, खीर, इडली, डोसा या कई तरह की मिठाइयां बना सकते हैं. नीचे दिए गए वीडियो पर क्लिक करके आप इस बारे में विस्तार से जानकारी पा सकते हैं.

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