...तो इसलिए होती है कोहरे में सांस लेने की परेशानी

क्या आपको पता है कि कोहरा सांस से संबंधि‍त बीमारियों का कारण बन सकता है. आइये जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और आप इस कोहरे वाले मौसम से खुद को कैसे बचाकर रख सकते हैं...

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मेधा चावला

  • नई दिल्ली,
  • 30 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 12:11 PM IST

ठंड ने दस्तक दे दी है और अपने साथ लेकर आया धुंध और कोहरा. हालांकि कुछ लोगों को इस मौसम से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, पर ज्यादातर लोगों के लिए कोहरे वाला मौसम मुसीबत बन जाता है.

देखा जाए तो कोहरा कोई नुकसानदेह चीज नहीं है, क्योंकि यह वायुमंडल की जलवाष्प के जमने से बनता है. पर प्रदूषण की वजह से शहरों के लिए इसकी परिभाषा बदल गई है. धुएं और सस्पेंन्डिड पार्टिकल्स यानी कि छोटे-छोटे प्रदूषि‍त कणों के इर्द-गिर्द जमने से बना यह कोहरा या यूं कह लें कि स्मोग हमारी पूरी सांस प्रणाली को तहस-नहस कर सकता है.

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इसके असर का अंदाजा आप अपनी आंखों में जलन, नाक में खुजली, गले में खराश और खांसी जैसे लक्षणों से लगा सकते हैं. कोहरे के साथ ये परेशानी सामान्य तौर पर आती ही हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में सांस की नली ज्यादा संवेदनशील हो जाती है. इससे सांस की नली सिकुड़ जाती है. यही वजह है कि ऐसे मौसम में सांस के रोगियों की आशंका बढ़ जाती है.


कोहरे की वजह से होने वाली परेशानी के लिए कहीं न कहीं धरती का गुरुत्वाकर्षण भी जिम्मेदार है. दरअसल, कोहरे में जो विषाणु पाए जाते हैं, वह धरती के गुरुत्वाकर्षण की वजह से जमीन के करीब आ जाते हैं और नाक व मुंह के जरिये हमारे अंदर प्रवेश कर जाते हैं.


अस्थमा के मरीजों पर खतरा

अस्थमा मरीजों के लिए धुंध बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि धुंध में प्रदूषण की परत होती है. इसमें नाइट्रोजन, ओजोन, कार्बन मोनो ऑक्साइड पार्टिकल्स जैसे खतरनाक गैस मौजूद होत हैं. पत्ती, लकडि़यों आदि को जलाए धुएं से दूर रहें. सांस से संबंधि‍त विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थमा रोगियों को रोजाना घर के अंदर ही व्यायाम जरूर करना चाहिए. इससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और धुंध का असर भी कम होता है.

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क्या करें

बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें. घर से निकलना अगर बहुत जरूरी है तो अपने कान, नाक और मुंह को अच्छी तरह ढक कर निकलें.

घर की खि‍ड़कियां बंद रखें, जिससे कोहरा आपके घर के अंदर न आ सके.


दमा या सांस के रोगी हैं तो सर्दी से बच कर रहें. पूरा शरीर ढक कर रखें, खासतौर से गले, सिर और कान को जरूर ढकें. डॉक्टर के संपर्क में रहें. साथ ही अपने इनहेलर की डोज भी ठीक कर लें.

सर्दियों में पानी ठंडा होने की वजह से साबुन और पानी से हाथ धोना कम कर देते हैं. अपनी यह आदत न छोड़े. हाथ से सबसे ज्यादा बीमारियां संचालित होती हैं. नहाने में आलस लगे तो गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें. सुबह-शाम स्टीम लें.


क्या न करें

धुंध वाला मौसम हो तो सुबह वॉक पर न जाएं. इससे फायदा कम नुकसान ज्यादा होगा.

सांस की बीमारी है तो सुबह ठंडे पानी से न नहाएं.


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