सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा लगाए गए 25 लाख रुपये के जुर्माने को अभी तक ना भरने से जुड़े सुराज इंडिया ट्रस्ट के मामले में बुधवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने NGO सुराज इंडिया (Suraz India Trust) के अध्यक्ष राजीव दहिया से अगले तीन दिनों में माफीनामा देने को कहा है. अदालत ने साफ किया कि माफीनामा ना देने का मतलब होगा कि आपने गलती की है.
‘जो आप चाहते हो, वही न्याय नहीं’
सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने राजीव दहिया को समझाते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था में एक पक्ष जीतता है, एक पक्ष हारता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि न्याय नहीं हुआ है, न्याय वो नहीं है जो आप चाहते हो. न्याय तो अपनी नजर और नजरिए से चलता है, आपकी इच्छा से नहीं. अब आप जिस भाषा में बोल रहे हैं, हम उसी भाषा में आपको समझा रहे हैं. आप सीधे-सीधे न्याय व्यवस्था को ही दोष दे रहे हैं और न्यायपालिका, जजों को जो मन में आए वो बोलते जा रहे हैं.
जस्टिस कौल ने इस दौरान कहा कि हमारा काम न्याय करने का है, हम न्याय करने को बैठे हैं. आपके कुछ भी बोलने से हम पर फर्क नहीं पड़ेगा, कानून तो सबके लिए बराबर है. आपके ऊपर है कि आप उसका इस्तेमाल कैसे करते हो.
जस्टिस कौल ने आगे कहा कि आप अपनी लाइसेंसी पिस्टल से गोली चला कर किसी को मार दो फिर कहो कि गलती मेरी नहीं लाइसेंस देने वाले की है. ये कोई तरीका है आपका? ऐसे नहीं चलेगा. लेकिन आपकी आदत है कि इतना कीचड़ उछालो कि सामने वाला खुद ही पीछे हट जाए.
पहले भी सख्त रुख अपना चुका है सुप्रीम कोर्ट
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पहले भी सख्त रुख अपना चुका है. दिसंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुराज इंडिया ट्रस्ट NGO को 25 लाख रुपये जुर्माना के देने होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने सुराज़ इंडिया ट्रस्ट NGO की आदेश को वापस लेने की याचिका को ख़ारिज किया था.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बेकार और गंभीरता से विचार न करने वाली याचिकाओं को दाखिल करने के मामले में सुराज इंडिया ट्रस्ट पर 25 लाख का जुर्माना लगाया था. सुप्रीम कोर्ट ने सुराज इंडिया ट्रस्ट और उसके अध्यक्ष राजीव दहिया को आजीवन कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने से भी बैन कर दिया था.
संजय शर्मा