उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति के लिए चयन करने वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के स्थाई सचिवालय में देश के सभी 25 हाईकोर्ट के वरिष्ठ जजों के पूल का रिकॉर्ड रहेगा. कम से कम 50 वरिष्ठ जजों का रिकॉर्ड फिलहाल तैयार रहेगा ताकि सुप्रीम कोर्ट में जजों के रिटायर होने से पहले ही उनकी नियुक्ति आसान हो सके, साथ ही रफ्तार भी बनी रहे और पारदर्शिता भी बने रहे.
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट के शोध और योजना केंद्र यानी सेंटर फॉर प्लानिंग एंड रिसर्च सीपीआर में ही कोलेजियम का स्थाई सचिवालय बना दिया है. सरकार भी सचिवालय की बात कह ही रही थी. सुप्रीम कोर्ट सूत्रों के मुताबिक सचिवालय में स्क्रीनिंग और रिकॉर्ड पर लाए गए वरिष्ठ जजों के आदेश, फैसले और व्यवहार बर्ताव का रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि सुप्रीम कोर्ट ने जज या जजों के रिटायर होते ही रिक्त स्थान भरने के लिए ऐन वक्त पर रिकॉर्ड खंगाले जाने की जद्दोजहद बचा जा सके.
सचिवालय में तैयार रिकॉर्ड सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर होंगे या नहीं इस पर निर्णय बाद में होगा. हालांकि इनके आरटीआई के दायरे में आने की गुंजाइश कम ही होगी क्योंकि जजों का रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के विशिष्ट अधिकार के तहत रहता है. इसे फिड्यूशियरी कैपेसिटी यानी विश्वास का अधिकार क्षेत्र कहते हैं.
सूचना का अधिकार कानून ऐसे विशिष्ट अधिकारों या क्षमता के तहत रखी गई जानकारी के सार्वजनिक करने का निषेध करता है और हाई कोर्ट्स के कॉलेजियम में ऐसे सचिवालय स्थापित ही नहीं हैं. लिहाजा वहां ऐसी स्थिति नहीं बन सकती. हालांकि न्यायिक सेवा यानी निचली अदालत से प्रोन्नत होकर हाईकोर्ट जज बनने वालों का पूरा रिकॉर्ड हाईकोर्ट में जरूर रहता है लेकिन बार से सीधे जज बनने वालों का रिकॉर्ड नहीं. इस व्यवस्था से सुप्रीम कोर्ट में जजों के रिक्त पद भरने में चौकसी, रफ्तार और पारदर्शिता बनी रहेगी.
संजय शर्मा