'धोनी 10 लाख जमा करें', मद्रास हाईकोर्ट का आदेश, जानें क्या है मामला

मद्रास हाईकोर्ट ने एमएस धोनी को उनके मानहानि केस से जुड़ी एक सीडी के ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद के लिए 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति आरएन मन्जुला ने दी है. कोर्ट ने कहा है कि ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद प्रक्रिया जटिल है. इसका खर्च वादकर्ता ही उठाता है.

Advertisement
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरप्रेटर और टाइपिस्ट का खर्च धोनी को वहन करना होगा (Photo: ITG) मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरप्रेटर और टाइपिस्ट का खर्च धोनी को वहन करना होगा (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

तमिलनाडु में स्थित मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी को उनके द्वारा दायर मानहानि केस से जुड़ी एक सीडी के कंटेंट के ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति आर एन मन्जुला ने एक अंतरिम आदेश के तहत दिया.

धोनी ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी सम्पथकुमार के खिलाफ 100 करोड़ रुपये के मानहानि हर्जाने का दावा किया था. धोनी पर आरोप था कि उन्हें 2013 में हुए आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले से जोड़ा गया था. इस मामले में कोर्ट ने संबंधित सीडी की सामग्री का ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद कराना आवश्यक माना था.

Advertisement

अदालत ने अपने आदेश में बताया कि 28 अक्टूबर 2025 के आदेश के तहत मीडिया कंटेंट को लिखित रूप में उतारने और इसका अनुवाद करने का काम कोर्ट के इंटरप्रेटर की ओर से शुरू किया जा चुका है. यह काम बेहद कॉम्पलेक्स और समय लेने वाला है. 

इंटरप्रेटर ने अदालत को सूचित किया है कि इस प्रोसेस को पूरा करने में लगभग तीन से चार महीने का वक्त लगेगा और इसमें एक इंटरप्रेटर और एक टाइपिस्ट की जरूरत पूरे समय के लिए होगी.

यह भी पढ़ें: 'उम्र पैमाना नहीं, फिटनेस जरूरी...', 2027 वर्ल्ड कप को लेकर रोहित शर्मा-विराट कोहली के समर्थन में उतरे एमएस धोनी

न्यायमूर्ति ने कहा कि सामान्य तौर पर वादकर्ता को ही दस्तावेज तैयार कर अदालत में पेश करना होता है, लेकिन इस विशेष मामले में आधिकारिक इंटरप्रेटर की आवश्यकता होने के कारण यह खर्च वादी यानी धोनी को ही देनी पड़ेगी.

Advertisement

अदालत ने आदेश दिया कि 10 लाख रुपये की राशि अगले महीने 12 मार्च तक मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राहत कोष खाते में जमा कराई जाए. साथ ही, इंटरप्रेटर को मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह तक ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद का काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी.

इनपुट: पीटीआई

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement