दिल्ली: 7.5 साल जेल में काटने के बाद भी नहीं मिली राहत, कोर्ट ने कहा कुलदीप सेंगर का आपाराधिक रिकॉर्ड गंभीर

उन्नाव हिरासत में मौत मामले में दोषी कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली. कोर्ट ने सजा निलंबन और जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि सेंगर का आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर है. वह 10 साल की सजा में से 7.5 साल जेल में काट चुके हैं, लेकिन कोई नई परिस्थिति सामने नहीं आई है.

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कुलदीप सेंगर (File Photo: ITG) कुलदीप सेंगर (File Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:48 PM IST

उन्नाव हिरासत में मौत मामले में दोषी करार दिए गए कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बार फिर निराशा हाथ लगी है. दिल्ली हाईकोर्ट की एकल जज पीठ, जस्टिस रविन्द्र डूडेजा ने सेंगर की सजा निलंबित करने और जमानत से जुड़ी याचिका खारिज कर दी है. यह याचिका पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दी गई दस साल के सश्रम कारावास की सजा से संबंधित थी.

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह सही है कि अपीलकर्ता कुलदीप सेंगर अब तक करीब 7.5 साल की सजा काट चुका है, लेकिन उनकी अपील की सुनवाई में हुई देरी का आंशिक कारण स्वयं सेंगर द्वारा बार बार अलग अलग याचिकाएं दाखिल करना भी रहा है. कोर्ट ने माना कि सजा निलंबन के लिए कोई नई या सुधारात्मक परिस्थिति सामने नहीं आई है.

दिल्ली हाईकोर्ट से कुलदीप सिंह सेंगर को मिला झटका 

दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा कि कुलदीप सेंगर के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर शीघ्र फैसला होता है तो यह उनके हित में होगा. अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर उचित समय पर सुनवाई की जाएगी.

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अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि सेंगर की कुल सजा दस साल की है, जिसमें से वह लगभग साढ़े सात साल जेल में बिता चुके हैं. इसके बावजूद सजा निलंबन के लिए दायर याचिका स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता.

करीब 7.5 साल की सजा काट चुका है कुलदीप

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंत में कहा कि अपीलकर्ता कुलदीप सेंगर के पिछले रिकॉर्ड, मामले की गंभीरता और नई परिस्थितियों के अभाव में दस साल की सश्रम कैद की सजा को निलंबित नहीं किया जा सकता. इसी के साथ सजा निलंबन और जमानत से जुड़ी याचिका खारिज कर दी गई.

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