कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. मंगलवार की रात बेंगलुरु का आलीशान शांग्रीला होटल सिर्फ डिनर के लिए नहीं, बल्कि एक बड़ी सियासी खिचड़ी पकने का गवाह बना. यहां करीब 45 विधायक जुटे, जिनमें ज्यादातर वो चेहरे थे जो पहली या दूसरी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. इन विधायकों के दिमाग में बस एक ही बात थी कि किसी तरह मंत्री की कुर्सी मिल जाए. आसान भाषा में कहें तो नए और युवा खून को अब सत्ता में हिस्सेदारी चाहिए.
होटल के बंद कमरों में घंटों चली इस चर्चा का मतलब यह था कि सीनियर नेताओं के साथ-साथ अब उन्हें भी मंत्री बनने का मौका मिलना चाहिए. मजे की बात यह है कि इसी दिन सुबह एक और गुट सक्रिय था. बीडीए (BDA) अध्यक्ष एन.ए. हैरिस के नेतृत्व में एक दर्जन से ज्यादा विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी. वो गुट उन लोगों का था जो तीन बार से ज्यादा चुनाव जीत चुके हैं. यानी एक तरफ अनुभवी खिलाड़ी अपना हक मांग रहे हैं, तो दूसरी तरफ युवा ब्रिगेड ने भी मोर्चा खोल दिया है.
मंगलवार रात के इस डिनर का अंत एक बड़े फैसले के साथ हुआ. इन सभी विधायकों ने तय किया है कि वे 26 मार्च को दिल्ली का रुख करेंगे और कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात करेंगे. लेकिन दिल्ली जाने से पहले ये सभी विधायक मुख्यमंत्री के सामने एक प्रेजेंटेशन देंगे. इस प्रेजेंटेशन में वे दलील देंगे कि आखिर उन्हें मंत्रिमंडल में क्यों शामिल किया जाना चाहिए और उनके होने से सरकार को क्या फायदा होगा. इस डिनर में एएस पोनन्ना, नयना मोतम्मा और भरत रेड्डी जैसे कई प्रमुख चेहरे मौजूद थे.
विधायकों ने साफ किया अपना इरादा
इस पूरी कवायद के पीछे सिर्फ मंत्री पद की चाहत नहीं है, बल्कि भविष्य की चिंता भी है. डिनर में मौजूद एक विधायक ने खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, 'हम करीब 45 विधायक एक साथ आए हैं ताकि अपनी बात मुख्यमंत्री और एआईसीसी (AICC) तक पहुंचा सकें. हमारा सीधा सा कहना है कि हम में से कुछ लोगों को कैबिनेट में जगह मिले. आखिर कब तक नए लोग सिर्फ कतार में खड़े रहेंगे?'
विधायकों का यह भी मानना है कि 2028 के अगले चुनावों को देखते हुए पार्टी को अभी से तैयारी करनी होगी. सरकार के भीतर जो राजनीतिक मतभेद और पावर स्ट्रगल चल रहा है, उस पर अब आर-पार का फैसला होना चाहिए. इन विधायकों को एक ठोस समाधान चाहिए ताकि वे अपने क्षेत्र में जाकर जनता को जवाब दे सकें. उन्हें लगता है कि अगर अभी स्पष्टता नहीं आई, तो आगे चलकर स्थिति और खराब हो सकती है.
फिलहाल, शांग्रीला होटल की इस मीटिंग ने कर्नाटक की राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है. अब सबकी नजरें 26 मार्च की दिल्ली यात्रा पर टिकी हैं. देखना दिलचस्प होगा कि क्या आलाकमान इन युवा विधायकों की बात मानता है या फिर पुराने दिग्गजों का ही पलड़ा भारी रहता है. लेकिन एक बात तो साफ है, बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक, कर्नाटक कांग्रेस के भीतर अब दांव-पेंच का दौर शुरू हो चुका है.
सगाय राज