कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी पत्नी को मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) स्कैम केस में बड़ी राहत मिल गई है. बेंगलुरु की जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष अदालत ने लोकायुक्त की बी रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती, मल्लिकार्जुन स्वामी के साथ ही देवराजू को भी क्लीन चिट दे दी है. यह फैसला MUDA केस में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
जज संतोष गजानन भट की कोर्ट ने लोकायुक्तत की बी रिपोर्ट स्वीकार नहीं करने की अपील वाली याचिका खारिज कर दी है. यह याचिकाकर्ता शिकायतकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की ओर से दायर की गई थी. इसमें लोकायुक्त की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देते हुए उसे अस्वीकार करने की मांग की गई थी.
कोर्ट ने लोकायुक्त के निष्कर्षों को बरकरार रखा, जिनमें कहा गया था कि चारों आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चलाने लायक कोई साक्ष्य नहीं मिला है. मामला मैसूर में 14 MUDA साइट्स के कथित अवैध आवंटन से जुड़ा है. लोकायुक्त ने जांच में इस आरोप को लेकर सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और अन्य दो आरोपियों के खिलाफ अभियोजन योग्य सबूत नहीं मिलने की बात कही थी.
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अब स्पेशल कोर्ट ने भी उसी रिपोर्ट को मान्यता दे दी है. स्पेशल कोर्ट ने लोकायुक्त के जांच अधिकारी के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को भी खारिज कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे जांच के लिए हरी झंडी दी है. साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति भी दी गई है.
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इस तरह स्पेशल कोर्ट के फैसले को सिद्धारमैया और उनकी पत्नी को बड़ी कानूनी राहत के तौर पर देखा जा रहा है. गौरतलब है कि लोकायुक्त ने अपनी बी रिपोर्ट में कहा था कि सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं. इसी रिपोर्ट को अस्वीकार करने की अपील शिकायतकर्ता ने की थी.
सगाय राज