मिसाइलों का दौर लौटने वाला है, जानें अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में क्या हो रहा है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 8 अप्रैल को युद्ध विराम की घोषणा के बाद से पिछले कुछ सप्ताह से शांति थी. सोमवार को फिर से कुछ ऐसी गतिविधियां शुरू हो गई, जिससे दोबारा जंग भड़कने का आशंका जताई जा रही है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर से बन रहे जंग जैसे हालात (Photo - Reuters) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर से बन रहे जंग जैसे हालात (Photo - Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:36 AM IST

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और ईरान की तनतनी फिर शुरू हो गई है. ईरान की आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी जहाज पर मिसाइल दागी है. वहीं यूएई ने भी ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने उसके तेल टैंकर पर ड्रोन से हमला किया है. ऐसे में फिर से मिसाइल हमलों का दौर लौटने के आसार बढ़ते दिखाई देने लगे हैं.  

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ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी ने दावा किया कि सोमवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जास्क के पास एक अमेरिकी नौसेना के जहाज पर दो मिसाइलें दागी गईं. ईरानी नेवी ने जब उन्हें चेतावनी दी तो अमेरिकी पोत ने उसे नजरअंदाज कर दिया था. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की गई. हालांकि अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर इस बात से इनकार किया कि उसके किसी जहाज पर हमला हुआ है.

फिर से बन रहे जंग जैसे हालात
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE)का कहना है कि ईरान ने होर्मुज में एडीएनओसी तेल टैंकर पर ड्रोन से हमला किया है. यूएई का कहना है कि ईरान ने  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उसकी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से जुड़े एक टैंकर पर ईरान की तरफ से दो आत्मघाती ड्रोन दागे गए.

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विदेश मंत्रालय ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और होर्मुज  का इस्तेमाल आर्थिक दबाव या ब्लैकमेल के हथियार के रूप में करना ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर द्वारा की गई समुद्री डकैती की हरकतें हैं. 

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे जहाजों को निकालने के लिए  'प्रोजेक्ट फ्रीडम' शुरू की बात कही थी. इस दौरान ईरान के किसी भी तरह के हस्तक्षेप से सख्ती से निपटने का निर्देश दिया था. वहीं ईरान के मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने एक बयान में कहा कि उनकी अगुआई में ईरान की सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को पूरी ताकत से बनाए रखेंगे और किसी भी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब देंगे. इस बाबत सोमवार को  ईरान ने अमेरिका के जहाजों पर मिसाइल दागने की बात कही है. 

यह भी पढ़ें: क्या है 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' ? जिसके शुरू होते ईरान ने अमेरिकी पोत पर दागी मिसाइल

ये ताजा तनाव ऐसे समय में सामने आया है जब ईरानी अधिकारी संभावित रूप से लंबे संघर्ष की तैयारी के लिए अपने समर्थकों को जुटा रहे हैं और 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को बातचीत के माध्यम से समाप्त करने के प्रयासों के बीच अमेरिका के साथ प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी रखे हुए हैं. 

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अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े पैमाने पर लड़ाई रोकने वाले युद्धविराम के लगभग एक महीने बाद, ईरानी अधिकारी जंग को फिर से शुरू होने की तैयारी कर रहे हैं. ईरान अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को फिर से दुरुस्त करने की कोशिश कर रहा है. इसके तहत गोला-बारूद और उपकरणों वाले अंडरग्राउंड ठिकानों के बमबारी से क्षतिग्रस्त प्रवेश द्वारों की खुदाई की जा रही है.

लोगों को व्यक्तिगत तौर पर जंग के लिए किया जा रहा तैयार
सेना की बख्तरबंद गाड़ियों के काफिले रात के समय तेहरान और अन्य शहरों की सड़कों पर घूमते रहते हैं. लाउडस्पीकरों से शहरों में युद्ध की ललकार जैसी गूंज सुनाई दे रही है. घरेलू मोर्चे पर युद्ध के लिए लोगों को सक्रिय रखने की यह गतिविधि "जान फदा" कहलाती है, जो इन दिनों ईरानी अधिकारियों का एक अभियान बन गया है. इसका अर्थ है वह व्यक्ति जो किसी उद्देश्य के लिए अपने जीवन का "बलिदान" करने को तैयार हो.

सरकारी मीडिया ने अभियान में भाग लेने वाले लोगों के कई साक्षात्कार प्रसारित किए हैं, जिन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो तो वे अपनी जान देने के लिए तैयार हैं. इस तरह ईरान अपने लोगों को अंतिम रूप से जंग लड़ने के लिए तैयार कर रहा है. ताकि, ईरान के नागरिक मानसिक तौर पर हर तरह के बलिदान के लिए तैयार रहे. जन फदा का कहना है कि उसके 31 मिलियन से अधिक सक्रिय सदस्य हैं, जो ईरान की आबादी के एक तिहाई से थोड़ा अधिक या 12 वर्ष से अधिक आयु की आबादी के आधे से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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