जब बीजिंग की सड़कों पर उतरे 10 लाख लोग, इसके बाद ही हुआ था तियानमेंग नरसंहार

आज के ही दिन चीन के तियानमेंग नरसंहार वाले आंदोलन की शुरुआत हुई थी और 3 जून को आंदोलनकारियों की भीड़ पर गोली चली थी जिसमें हजारों छात्र मारे गए थे.

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तियानमेंग नरसंहार वाले आंदोलन की आज के दिन ही हुई थी शुरुआत (Photo - Pexels) तियानमेंग नरसंहार वाले आंदोलन की आज के दिन ही हुई थी शुरुआत (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:43 PM IST

17 मई 1989 को चीन की राजधानी बीजिंग में लगभग दस लाख प्रदर्शनकारियों की भीड़ एक साथ सड़कों पर उतर आई. लोगों ने लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था की मांग करते हुए मार्च निकाला था. कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ सबसे बड़े आंदोलन की इसी दिन शुरुआत हुआ और कुछ ही दिनों बाद इसे कुचलने के लिए तियानमेंग चौक पर पुलिस ने फायरिंग कर  हजारों छात्रों को मार गिराया था.   

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चीन में विरोध प्रदर्शन 1980 के दशक के मध्य से ही पनप रहे थे, जब कम्युनिस्ट सरकार ने अर्थव्यवस्था पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील देने की घोषणा की. जिससे एक मुक्त बाजार का विकास संभव हो सके. इस कदम से उत्साहित होकर, कई चीनी नागरिकों (विशेषकर छात्रों) ने राजनीतिक मोर्चे पर भी इसी तरह की कार्रवाई की मांग शुरू कर दी. 1989 की शुरुआत तक, चीन के कुछ सबसे बड़े शहरी क्षेत्रों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन होने लगे.

 इनमें से सबसे बड़ा प्रदर्शन बीजिंग के केंद्र में स्थित तियानमेन चौक के आसपास हुआ. मई 1989 के मध्य तक, भारी भीड़ गीतों, नारों और बैनरों के साथ सड़कों पर उतर आई, जिसमें  कुछ कट्टरपंथी चीनी अधिकारियों को हटाने की मांग की गई थी. चीनी सरकार ने इसके जवाब में और भी कठोर कदम उठाए, जिनमें कुछ प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और पिटाई शामिल थी.

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तियानमेंग में हुआ था नरसंहार
3 जून 1989 को, चीनी सशस्त्र बलों ने तियानमेन चौक पर धावा बोल दिया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया. इस घटना में हजारों लोग मारे गए और 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसे तियानमेन चौक नरसंहार के नाम से जाना जाता है. इस घटना में हजारों छात्रों और युवाओं की जान चली गई थी. 

इन विरोध प्रदर्शनों ने विश्व का ध्यान आकर्षित किया. सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने प्रदर्शनकारियों की सराहना की और सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि कम्युनिस्ट चीन में सुधार आवश्यक है.अमेरिका में, अमेरिकी प्रेस ने चीनी छात्रों को नायकों की तरह माना. तियानमेन स्क्वायर नरसंहार के बाद, स्तब्ध अमेरिकी सरकार ने चीन को हथियारों की बिक्री निलंबित कर दी और आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए. हालांकि, चीनी सरकार ने झुकने से इनकार कर दिया और प्रदर्शनकारियों को चीनी समाज के अराजक तत्व करार दिया.

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