किराए पर रहते हैं? मकान मालिक इन कामों के लिए नहीं कर सकता मना

किराए के घर में रहने वालों के लिए यह जानना जरूरी है कि मकान मालिक हर चीज पर रोक नहीं लगा सकता. सामान की मरम्मत, लेट नाइट पार्टी और घर आने-जाने के समय जैसे मुद्दे रेंट एग्रीमेंट और सामान्य नियमों के अनुसार तय होते हैं.

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किरायेदार की प्राइवेसी और पर्सनल फ्रीडम का सम्मान करना भी जरूरी है. ( Photo: Pexels) किरायेदार की प्राइवेसी और पर्सनल फ्रीडम का सम्मान करना भी जरूरी है. ( Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

अगर आप किराए के घर में रहते हैं, तो आपके मन में कई बार यह सवाल आता होगा कि मकान मालिक किन बातों पर रोक लगा सकता है और किन पर नहीं. अगर आप भी किराए के घर में रहते हैं तो अक्सर आपने देखा होगा कि छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद हो जाता है- जैसे सामान की मरम्मत, लेट नाइट पार्टी या घर आने-जाने का समय. इन सभी मामलों में सबसे जरूरी बात यह है कि भारत में इन चीजों के लिए कोई एक तय कानून हर स्थिति पर लागू नहीं होता, बल्कि ज्यादातर नियम रेंट एग्रीमेंट के अनुसार तय होते हैं. फिर भी कुछ सामान्य नियम और अधिकार होते हैं, जिन्हें जानना हर किरायेदार के लिए जरूरी है. पटियाला कोर्ट के वकील महमूद आलम से जानते हैं क्या है किराएदार के अधिकार.

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वकील महमूद आलम ने बताया कि अगर मकान मालिक ने घर देते समय पंखा, लाइट, गीजर या अन्य बेसिक सुविधाएं दी हैं, तो उनकी मरम्मत की जिम्मेदारी आमतौर पर मकान मालिक की होती है. यानी अगर पंखा खराब हो जाता है या कोई फिटिंग काम नहीं कर रही, तो उसे ठीक करवाना मकान मालिक का काम है. लेकिन इसमें एक शर्त भी होती है- अगर किरायेदार ने जानबूझकर या गलत इस्तेमाल से सामान खराब किया है, तो उसकी जिम्मेदारी किरायेदार की मानी जाएगी. वहीं, अगर किरायेदार खुद अपने पैसे से पंखा, फ्रिज, वॉशिंग मशीन या अन्य चीजें लगाता है, तो उनकी देखभाल और मरम्मत पूरी तरह उसी की जिम्मेदारी होती है.

इन चीजों की परमिशन नहीं देगा मकान मालिक
अब बात करते हैं लेट नाइट पार्टी की. कई लोग सोचते हैं कि अगर मकान मालिक ने परमिशन दे दी, तो रात में पार्टी करना पूरी तरह सही है, लेकिन ऐसा नहीं है. अगर आपकी पार्टी से पड़ोसियों को परेशानी होती है, ज्यादा शोर होता है या सोसायटी के नियमों का उल्लंघन होता है, तो यह गलत माना जाएगा. ऐसे मामलों में पुलिस या सोसाइटी एक्शन ले सकती है, चाहे मकान मालिक ने पहले अनुमति क्यों न दी हो. यानी आपकी आजादी वहीं तक है, जहां तक दूसरे लोगों को परेशानी न हो.

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तीसरा और बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है- घर आने-जाने का समय. कुछ मकान मालिक किरायेदारों के लिए टाइम टेबल तय करने की कोशिश करते हैं, जैसे लेट आने पर काफी नाराज होना या किराएदार के लिए एक समय सेट करना कि आपको रात को इतने बजे तक घर आना है.  रात में एक तय समय के बाद घर आने की मनाही. लेकिन यह सही नहीं है. किसी भी किरायेदार की प्राइवेसी और पर्सनल फ्रीडम का सम्मान करना जरूरी है. मकान मालिक इस तरह का नियम नहीं बना सकता, क्योंकि यह किरायेदार के निजी अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है. हां, अगर सोसाइटी या बिल्डिंग के कुछ सामान्य नियम हैं- जैसे सिक्योरिटी गेट का समय, तो उनका पालन करना पड़ सकता है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मकान मालिक समय तय नहीं कर सकता.

घर लेने से पहले पढ़ें रेंट एग्रीमेंट
इन सब बातों से साफ है कि किराए पर रहने के दौरान अधिकार सिर्फ मकान मालिक के ही नहीं, बल्कि किरायेदार के भी होते हैं. इसलिए घर लेने से पहले रेंट एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है. उसमें साफ लिखा होना चाहिए कि कौन-सी जिम्मेदारी किसकी है- मरम्मत, मेंटेनेंस, नियम और शर्तें आदि. इससे आगे चलकर किसी भी तरह का विवाद होने की संभावना कम हो जाती है.  

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