1909 में मेडिटेरियन सी के तट पर जाफा पोर्ट के करीब यूरोप के अलग-अलग शहरों से आए 66 परिवार ने अपना आशियाना बसाने का फैसला किया. उनलोगों ने जमीन के टुकड़े को आपस में बांटने के लिए समुद्री सीपियों को उछालकर ये तय किया कि किसका घर कहां होगा. तेल अवीव का सफर ऐसे शुरू हुआ था.
आज तेल अवीव इजरायल की राजधानी और एक प्रमुख शहर है, जहां देश की बड़ी आबादी बसती है. लेकिन, शुरुआत में यह सिर्फ 66 परिवार का घर था, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से यहां आकर बसे थे. इस शहर की आधारशिला ही अपने लोगों को एक जगह, एक स्थायी घर देने की सोच के साथ रखी गई थी. ऐसे में जानते हैं तेल अवीव का मतलब क्या होता है और इस शहर की कहानी क्या है?
करीब 117 साल पहले तेल अवीव की नींव रखी गई थी. तब इस शहर का नाम कुछ और था. यूरोप में रहने वाले वैसे यहूदी परिवार जिनका घर पीछे छूट गया था. उन्हें एक ऐसे शहर की जरूरत थी, जिसकी बसावट उनके पुराने माहौल की तरह हो, जो इस नए जगह पर उन्हें अपने घर होने का एहसास दिला सके. 1909 में जायोनिस्ट नेता आर्थर रुपिन ने सिर्फ 66 परिवार के लिए ऐसा ही एक शहर बसाने का फैसला किया.
शहर के निर्माण के लिए आर्थर रुपिन ने जूइस नेशनल फंड (Jewish National Fund) से कर्ज लिया. उन्होंने नए शहर के लिए जाफा के प्राचीन बंदरगाह के पास एक इलाके को चुना. उन्होंने इस यहूदी उपनगर को जहां उनके अपने समाज के लोग रहने वाले थे, उसे 'अहुजात बायित' कहा, जिसका मतलब 'घर'होता है. अहुजात बायित को यूरोप में छोड़े गए छोटे शहरों जैसा शहर बनाना चाहते थे.
क्या था तेल अवीव का पुराना नाम
अहुजात बायित के रूप में रुपिन इस शहर को जायोनिस्ट संस्कृति के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहते थे. उनके मुताबिक, यह शहर हिब्रू प्रकृति के साथ, आधुनिक शहरी मपदंडों पर भी कसा होना चाहिए था. इसके लिए उन्होंने शहर का मार्केटिंग ब्रोशर तैयार किया था, जिसमें इसका विज्ञापन दिया गया था- भविष्य के इस शहर में सड़कें, फुटपाथ और बिजली होगी. प्रत्येक घर में बहता पानी और सीवेज पाइपिंग होगी.
11 अप्रैल, 1909 को, छियासठ परिवार समुद्र तट पर इकट्ठा हुए और यह निर्धारित करने के लिए सीपियां निकालीं कि किसे जमीन का कौन सा टुकड़ा मिलेगा. इसके बाद अहुजात बायित का निर्माण शुरू हुआ और ऐसे भविष्य के तेल -अवीव की नींव पड़ी.
तेल अवीव नाम कैसे पड़ा
एक साल बाद यानी की 1910 में इस छोटे से कस्बे को एक ऐसा नाम दिया गया जो इसके प्राचीन, समृद्ध इतिहास और यहूदी रिनुअल या यहूदी मूल्यों और विरासत की दोबारा स्थापना को दर्शाता हो. इस लिए अहुजात बायित की जगह इसका नाम तेल अवीव रखा गया.
तेल अवीव शब्द हिब्रू बाइबिल के यहेजकेल की पुस्तक से लिया गया था. इस शब्द का जिक्र बेबीलोन में रहने वाले यहूदियों के बारे में बताते हुए इस प्रकार किया गया है - तब मैं तेल अवीव में उन बंदी लोगों के पास आया. तेल अवीव, हर्जल की 1902 में लिखी पुस्तक 'अल्टन्यूलैंड' (पुरानी नई भूमि) का हिब्रू शीर्षक भी था.
हिब्रू में 'तेल ' का मतलब वैसे प्राचीन टीले से है जिसके नीचे अतीत की बस्तियों यानी पुरातात्विक अवशेषों की परतें होती हैं. वहीं 'अवीव' का अर्थ स्प्रिंग (वसंत) यानी नया जीवन होता है. इस तरह तेल अवीव का एक अर्थ इतिहास के अवशेष पर शुरू हुआ नया जीवन और "वसंत की पहाड़ी" है.
आज कैसा दिखता है ये शहर
तेल अवीव को पहला हिब्रू शहर भी कहा जाता है. आज इसकी अबादी 33 लाख से अधिक है. इस शहर के मेट्रोपोलिटन एरिया को गुशदान कहा जाता है. यरुशल के बाद तेल अवीव इजरायल का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. यह यहां का प्रमुख आर्थिक और तकनीकी केंद्र है.
aajtak.in