26 मार्च 1953 को पोलिया का टीका विकसित कर लेने की घोषणा की गई थी. अमेरिकी चिकित्सा शोधकर्ता डॉ. जोनास साल्क ने एक राष्ट्रीय रेडियो कार्यक्रम में पोलियो टीका तैयार कर लेने की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया कि पोलियोमाइलाइटिस के खिलाफ एक टीके का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है , जो पोलियो नामक अपंग करने वाली बीमारी का कारण बनने वाला वायरस है. इसके खिलाफ यह वैक्सीन एंटीबॉडी का काम करती है.
1952 में, जब पोलियो महामारी फैली थी, तब सिर्फ अमेरिका में 58,000 नए मामले सामने आए थे. इनमें से 3,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी. यह बीमारीमुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती है. इसके उन्मूलन में उनके योगदान के लिए डॉ. साल्क को अपने समय का महान चिकित्सक माना गया.
पोलियो, एक ऐसी बीमारी जिसने इतिहास में कई बार मानवता को प्रभावित किया है. यह तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है और अलग-अलग स्तर का लकवा पैदा कर सकती है. चूंकि यह वायरस आसानी से फैलता है, इसलिए 20वीं सदी के शुरुआती दशकों में महामारी आम बात थी. संयुक्त राज्य अमेरिका में पोलियो की पहली बड़ी महामारी 1894 की गर्मियों में वर्मोंट में फैली और 20वीं सदी तक हर साल हजारों लोग इससे प्रभावित होते थे.
अमेरिकी राष्ट्रपति भी हुए थे पोलियो से ग्रसित
20वीं सदी के शुरुआती दशकों में, उपचार सीमित थे, जिनमें क्वारंटाइन और कुख्यात "आयरन लंग" शामिल था, जो सांस लेने में सहायता करने वाला धातु का ताबूत जैसा उपकरण था. हालांकि, बच्चे, और विशेष रूप से शिशु, सबसे ज्यादा प्रभावित होते थे. वयस्क भी अक्सर इससे पीड़ित होते थे. जिनमें भावी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट भी शामिल थे , जो 1921 में 39 वर्ष की आयु में पोलियो से पीड़ित हुए और आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गए.
बाद में रूजवेल्ट ने जॉर्जिया के वार्म स्प्रिंग्स में स्थित अपनी संपत्ति को पोलियो पीड़ितों के लिए एक पुनर्वास केंद्र में बदल दिया और पोलियो से संबंधित अनुसंधान और पोलियो रोगियों के उपचार के लिए धन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
साल्क का जन्म 1914 में न्यूयॉर्क शहर में हुआ था. उन्होंने सबसे पहले 1930 के दशक में न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में मेडिकल छात्र रहते हुए वायरस पर शोध किया और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फ्लू के टीके विकसित करने में मदद की. 1947 में वे पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में एक शोध प्रयोगशाला के प्रमुख बने और 1948 में उन्हें पोलियो वायरस का अध्ययन करने और एक संभावित टीका विकसित करने के लिए अनुदान प्राप्त हुआ. 1950 तक उनके पास पोलियो के टीके का प्रारंभिक संस्करण तैयार कर लिया था.
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साल्क ने पूर्व पोलियो रोगियों और स्वयं तथा अपने परिवार पर पहला मानव परीक्षण किया और 1953 तक अपने निष्कर्षों की घोषणा करने के लिए तैयार थे. यह घोषणा 26 मार्च की शाम को सीबीएस राष्ट्रीय रेडियो नेटवर्क पर हुई और दो दिन बाद जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में एक लेख प्रकाशित हुआ. डॉ. साल्क रातोंरात मशहूर हो गए.
1954 में, साल्क वैक्सीन और प्लेसीबो का उपयोग करके 13 लाख अमेरिकी स्कूली बच्चों पर नैदानिक परीक्षण शुरू हुए. अप्रैल 1955 में, यह घोषणा की गई कि वैक्सीन प्रभावी और सुरक्षित है और एक राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू हुआ.
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