ईंट, चिड़िया, हुकूम, पान... क्यों पड़े ताश के पत्तों के ये नाम? कभी सोचा है!

कभी आपने सोचा है कि आखिर कि ताश के पत्तों में ईंट, चिड़िया और हुकुम नाम कैसे पड़े होंगे और इनकी शेप के पीछे की क्या कहानी है?

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ताश की शुरुआत 15वीं शताब्दी में हुआ था. (Photo: Pexels) ताश की शुरुआत 15वीं शताब्दी में हुआ था. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

अगर आप ताश खेलते होंगे या फिर किसी को ताश खेलते देखा होगा तो ईंट, चिड़िया, हुकुम जैसे नाम जरूर सुने होंगे. कभी आपने सोचा है कि आखिर ताश के पत्तों के नाम के पीछे की क्या कहानी है और आखिर कैसे इस तरह के नाम रखे गए होंगे. तो जानते हैं इन सवालों के जवाब कि आखिर ताश के इन पत्तों को ऐसे नाम कैसे मिले. साथ ही सवाल ये भी है कि क्या विदेश में भी ताश के पत्तों के नाम ऐसे ही हैं या फिर अंग्रेजी में इन्हें और कुछ कहा जाता है...

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ताश में चार तरह के पत्ते होते हैं, जिसमें दो लाल और दो काले रंग के होते हैं और सभी की शेप अलग अलग होती है. इन शेप को पान, ईंट, चिड़िया, हुकुम कहा जाता है. खास बात ये है कि 15वीं सदी से ये गेम चला आ रहा है और यूरोप से शुरू हुआ गेम अभी भी वैसे ही चला आ रहा है. सब इन कार्ड को अपने अपने तरीकों और नियमों से खेलते हैं. 

अंग्रेजी में ताश के इन चार सूट को क्या बोलते हैं?

Hearts ♥ - पान
Diamonds ♦ - ईंट
Clubs ♣ - चिड़िया
Spades ♠ - हुकुम

क्या है इनकी कहानी?

माना जाता है कि यूरोप से प्लेइंग कार्ड्स की शुरुआत हुई थी. इसमें कुछ कुछ बदलाव होते रहते हैं. इतालवी डेक में छप्पन पत्ते होते थे, जिनमें पत्ते दरबार को दिखाते थे और अलग अलग सूट चार पंथ को दिखाते थे, ये कप, तलवार, सिक्के और छड़ी में बांटे गए थे. ताश के पत्तों में दरबारी पत्तों को पहले नाम से नहीं पहचाना जाता था. राजाओं (साथ ही रानियों और गुलामों) को पहचान देना एक अस्थायी प्रथा थी, जो फ्रांसीसी कार्ड मास्टर्स के बीच लगभग 15वीं शताब्दी के मध्य में शुरू हुई थी.

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18वीं शताब्दी के अंत में बंद कर दी गई. अब भले ही इन्हें बादशाह या बेगम आदि कहते हैं, लेकिन अब ये किसी प्रतिनिधित्व नहीं करते. ये शतंरज के जैसा ही है, जहां भी राजा रानी वजीर सिपाही जैसे नाम दिए जाते हैं, मगर अब ऐसा नहीं है.  

अगर इनके सूट की बात करें तो विदेश में चार शेप को Hearts, Diamonds, Clubs, Spades के नाम से जाना जाता है. कुछ देशों में डायमंड को टाइल के नाम से जाना जाता है. फ्रेंच में Hearts, tiles, Clovers, Pikes शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं. 

अगर भारत की बात करें तो ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जो ये बताता हो कि किसने ऐसे नाम दिए. बस विदेशी पत्तों के नाम और शेप के आधार पर हिंदी नाम दिए गए और ये प्रचलित हो गए. जैसे पान हर्ट की शेप को देखकर मिला और ईंट नाम टाइल्स से मिला और Spades यानी काले पान को हुकुम कहा जाने लगा. चिड़िया नाम के बीच तर्क दिया जाता है कि ये सबसे हल्का पत्ता था और इसे चिड़िया से जोड़ा गया. लेकिन, ये कोई इसका आधिकारिक कारण नहीं है कि इस वजह से नाम मिले. इन नामों को लेकर अलग अलग थ्योरी हैं. 
 

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