सिर्फ डेढ़ दिन... शिवालिक, नंदा देवी से आई LPG से कितने सिलेंडर भर पाएंगे?

ईरान जंग के बीच एलपीजी लेकर शिवालिक और नंदा देवी जहाज भारत आ चुके हैं. तो जानते हैं कि आखिर इससे कितनी आपूर्ति हो पाएगी?

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शिवालिक से 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी भारत आई है. (Photo: PTI) शिवालिक से 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी भारत आई है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:49 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बाद एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. लेकिन, अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत में एलपीजी की आपूर्ति होना शुरू हो गई है. भारत के दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी भारत पहुंच चुके हैं. शिवालिक के बाद मंगलवार सुबह नंदा देवी भी भारत आ चुका है. ऐसे में सवाल है कि आखिर दोनों जहाजों से कितनी एलपीजी आ रही है और इससे कितने दिन की आपूर्ति हो पाएगी. साथ ही समझते हैं कि अब कितने सिलेंडर भर पाएंगे... 

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भारत कितनी गैस आ रही है?

सोमवार को भारत पहुंचे शिवालिक में करीब 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी भारत पहुंची है. इसमें से 20 हजार मीट्रिक टन गैस को गुजरात के मुद्रा पोर्ट पर खाली किया गया है और बाकी गैस को मैंगलोर भेजा जाएगा. सबसे पहले इस गैस को पाइपलाइन के जरिए पोर्ट पर टैंक में खाली किया जाएगा. इसके बाद इसे बोटलिंग प्लांट पर भेजा जाएगा, जहां से सिलेंडर में भरकर गैस को घर-घर तक पहुंचाया जाएगा. 

कितने सिलेंडर भर पाएंगे?

अगर सिर्फ शिवालिक की बात करें तो शिवालिक में आई 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी को जब सिलेंडर में भरा जाएगा तो करीब 32.2 लाख सिलेंडर भरे जा सकेंगे. बता दें कि एक घरेलू सिलेंडर में 14.2 किलो गैस आती है. वहीं, नंदा देवी से करीब 47 हजार मीट्रिक टन गैस भारत आ गई है, जो मंगलवार सुबह भारत पहुंच गया है.

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कितने दिन की पूर्ति होगी?

बता दें कि दोनों जहाजों से 93 हजार मीट्रिक टन एलपीजी भारत को मिलेगी. यानी दोनों जहाजों की गैस से करीब 68 लाख सिलेंडर भरे जा सकेंगे. वहीं, भारत में हर रोज 55 लाख गैस सिलेंडर की आवश्कता होती है. इससे डेढ़ दिन की जरूरत पूरी होगी. इसके अलावा अभी भारत के पास कई दिन का स्टॉक है. तो पैनिक की कोई आवश्यकता नहीं है. 

दी जाएगी प्राथमिकता

सरकार ने बंदरगाह अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिवालिक और नंदा देवी दोनों जहाजों से एलपीजी गैस को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द उतारा जाए. एलपीजी संकट से निपटने के लिए सबसे पहले घरेलू परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके बाद अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को राहत दी जाएगी और अंत में अन्य व्यावसायिक संस्थानों को स्थिति के अनुसार प्राथमिकता दी जाएगी.
 

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