मकान मालिक पर इस वजह से लगा जुर्माना... क्या आपके लैंडलॉर्ड भी ऐसा करते हैं?

अगर आप भी किराएदार हैं तो आपको ये जानना चाहिए कि आखिर आपका मकान मालिक क्या क्या नहीं कर सकता है?

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मकान मालिक आपके घर में जबरदस्ती नहीं घुस सकता है. (Photo: pexels) मकान मालिक आपके घर में जबरदस्ती नहीं घुस सकता है. (Photo: pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:45 PM IST

हाल ही में केरल हाईकोर्ट ने एक मकान मालिक पर जुर्माना लगाया है और इसकी वजह ये है कि मकान मालिक जबरन किराएदार के कमरे में घुसा और उसका सामान फेंक दिया. इस मामले में हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था. ऐसे में अगर आप भी किराएदार हैं तो आपको मकान मालिक से जुड़े कुछ नियमों को ध्यान रखना चाहिए. तो जानते हैं मकान मालिक क्या क्या काम नहीं कर सकता है?

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कोर्ट ने क्यों लगाया जुर्माना?

केरल हाईकोर्ट का कहना है अगर कोई भी व्यक्ति, भले ही वह मकान का मालिक क्यों न हो, किसी दूसरे के वैध कब्जे वाली जगह में गैरकानूनी तरीके से प्रवेश नहीं कर सकता. कोर्ट ने कहा कि मालिकाना हक के नाम पर कानून तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब प्रवेश का उद्देश्य किसी गैरकानूनी काम को अंजाम देना हो.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, केरल हाईकोर्ट ने किराए की संपत्ति का मालिक आपराधिक इरादे से अपनी संपत्ति में प्रवेश करने के लिए दोषी ठहराया जा सकता है, जबकि संपत्ति किरायेदार के वैध कब्जे में है. 

ऐसे में अगर आपका मकान मालिक भी बिना परमिशन और जबरदस्ती गलत इरादे से उस जगह कमरे, फ्लैट, दुकान में घुसता है, जिसके लिए आप किराया दे रहे हैं तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है. इस मामले में आप मकान मालिक के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं और कोर्ट में जा सकते हैं. 

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वैसे भारत में घर किराए पर लेना और देना को लेकर मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 के आधार पर एक नया ढांचा तैयार किया जा रहा है. इससे किराए के सिस्टम को ज्यादा साफ, व्यवस्थित और संतुलित बनाया जा रहा है ताकि मकान मालिक और किरायेदार दोनों के बीच विवाद कम हों और नियम स्पष्ट रहें. इस नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब किराए का पूरा मामला औपचारिक (फॉर्मल) बनाया जा रहा है.

पहले कई लोग बिना लिखित एग्रीमेंट या सिर्फ 11 महीने के अनरजिस्टर्ड कॉन्ट्रैक्ट पर रहते थे, लेकिन अब लिखित रेंट एग्रीमेंट जरूरी होगा और उसे रेंट अथॉरिटी के पास रजिस्टर भी कराना होगा. इससे दोनों पक्षों के बीच तय शर्तें साफ-साफ रिकॉर्ड में रहेंगी और पारदर्शिता बढ़ेगी.

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