अंदर से ऐसी है लाहौर की मेट्रो... दिल्ली वाली मेट्रो से है इतनी अलग! देखें तस्वीरें

आज पाकिस्तान के लाहौर में चलने वाली मेट्रो के बारे में जानते हैं और देखते हैं कि ये भारत के शहरों की मेट्रो से कितनी अलग है.

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लाहौर मेट्रो भी दिल्ली मेट्रो से ही मिलती जुलती है. (Photo: AFP) लाहौर मेट्रो भी दिल्ली मेट्रो से ही मिलती जुलती है. (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:39 PM IST

अब भारत के कई शहरों में तो मेट्रो चलने लगी है और आपने भारत की मेट्रो की फैसिलिटी का अनुभव किया होगा. लेकिन, क्या आप जानते हैं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में कैसी मेट्रो है और वहां की मेट्रो भारत की मेट्रो से कितनी अलग है. आपको बता दें कि पाकिस्तान में सिर्फ एक शहर में ही मेट्रो चल पाई है और वो है लाहौर. लाहौर में कुछ सालों से चीन की मदद से एक रूट पर मेट्रो चल रही है, जो काफी छोटा रूट है. दिल्ली के मुकाबले यहां काफी छोटा नेटवर्क है. तो जानते हैं कि आखिर लाहौर की मेट्रो कैसी है और अंदर से कितनी अलग है?

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लाहौर में साल 2020 में मेट्रो चली थी और अभी एक लाइन पर मेट्रो चल रही है, जो ऑरेंज लाइन मेट्रो है. अभी ये करीब 27 किलोमीटर के रूट पर चलती है. इसका बड़ा हिस्सा एलिवेटेड के रुप में यानी 26 किलोमीटर हिस्सा पुल के ऊपर चलता है. वहीं, 1.7 किलोमीटर तक अंडरग्राउंड चलती है, जिसमें 2 अंडर ग्राउंड है. 

दिल्ली में काफी बड़ा हिस्सा अंडर ग्राउंड भी है. लेकिन, पाकिस्तान की मेट्रो की खास बात ये है कि ये पूरी तरह से फुली ऑटोमैटिक है यानी ड्राइवरलैस है.

कई मामलों में ये भारत की मेट्रो जैसी है. इसकी स्पीड भी 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक है, जो 45 घंटे में सफर करती है. वहीं दिल्ली मेट्रो की स्पीड भी इतनी है. अगर ऑटोमैटिक संचालन की बात करें तो भारत की सभी मेट्रो पूरी तरह से ऑटोमैटिक है. 

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आप नीचे तस्वीरों में देख सकते हैं कि वो दिल्ली या दूसरे शहर की मेट्रो से कितनी अलग है...

एक नजर में आपको ये भारत की मेट्रो से मिलती जुलती नजर आएगी. अंदर से देखने में भी ये भारत की मेट्रो जैसी ही लगती है. 

चीन की मदद से बनी है मेट्रो

इस मेट्रो लाइन को चीन की मदद से बनाया गया है. इस परियोजना की लागत 300 अरब रुपये है. इस परियोजना को पूरा करने में कई साल की देरी हुई और कई राजनीतिक विवाद हुए. चीन ने अपनी बेल्ट एंड रोड पहल के तहत पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया था. यह परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का एक प्रमुख हिस्सा है और इसे चीन के सहयोग से ही पूरा किया जा सका है. 

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