शार्क के पंख का सूप.... जानिए क्या-क्या खाता था तानाशाह किम जोंग इल?

नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के पिता भी बहुत बड़े तानाशाह थे. उनका नाम किम जोंग इल था. किम जोंग उन की तरह उनके पिता से जुड़ी भी कई अजीबोगरीब ऐसी चीजें थी, जिसके बारे में आज भी चर्चा होती है. उनमें से ही एक था उनका खाना-पान और उससे जुड़े तौर-तरीके.

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किम जोंग ईल के खाने-पीने में कुछ अजीबोगरीब चीजें थीं पसंद (Photo - Pexels) किम जोंग ईल के खाने-पीने में कुछ अजीबोगरीब चीजें थीं पसंद (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST

दुनियाभर में कई देशों में अलग-अलग वक्त में कई तानाशाह हुए और इन लोगों ने अपने तरीके से देश विशेष को चलाया. चाहे नॉर्थ कोरिया हो, या जर्मनी, या चीन, या कंबोडिया या अफ्रीका, एशिया, यूरोप या अमेरिकी महाद्वीप के कोई भी कंट्री. हर जगह के तानाशाह किसी न किसी अजीबोगरीब आदत की वजह से चर्चा में रहे हैं.  

विक्टोरिया क्लार्क और मेलिसा स्कॉट नाम के दो राइटर्स ने तानाशाहों के खान-पान से जुड़े ऐसे ही अजीब आदतों और तौर तरीके से जुड़ी जानकारी पर एक किताब लिखी है - "डिक्टेटर्स डिनर्स: ए बैड टेस्ट गाइड टू एंटरटेनिंग टायरेन्ट्स". इसमें तानाशाहों के खाने-पीने के तौर-तरीकों, खान-पान की बुरी आदतों और जहर दिए जाने के डर के बारे में चौंकाने वाली जानकारी है. साथ ही कुछ वैसे व्यंजनों की रेसिपी भी शामिल  हैं.

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बिजनेस इनसाइडर ने किताब से कई निर्दयी तानाशाहों का चयन किया और उनके पसंदीदा भोजन और रात के खाने के समय की उनकी कुछ भयावह सनक को के बारे में बताया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, किम जोंग इल को शार्क के पंख का सूप और कुत्ते के मांस का सूप बहुत पसंद था.

शार्क के पंख का सूप था बेहद पंसद
किम जोंग इल के पसंदीदा भोजन कथित तौर पर शार्क-फिन सूप, सैलो और कुत्ते के मांस का सूप थे. इनके बारे में उनका मानना ​​था कि ये उन्हें रोग प्रतिरोधक क्षमता और पौरुष प्रदान करते थे. यह भी कहा जाता है कि वे हेनेसी के सबसे बड़े ग्राहक थे.

इसके साथ ही उनके खान-पान के तौर-तरीके भी कुछ अजीब थे. उन्होंने महिलाओं की एक टीम को सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया था कि उन्हें परोसे जाने वाले सभी चावल के दानों का आकार और रंग एक जैसे हों. किम जोंग इल 1994 से 2011 तक उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता थे. कोई भी दाना छोटा या बड़ा नहीं हो सकता था. उनके शासनकाल में, उत्तर कोरिया की बुरी तरह से कुप्रबंधित अर्थव्यवस्था चरमरा गई और वहां के लोगों को अकाल का सामना करना पड़ा.

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