अक्सर आपने देखा होगा कि गांव की पैतृक जमीन में कोई ना कोई विवाद होता है. कई बार होता है कि जमीन पर कब्जा किसी और का है और कागजों में नाम किसी और का है. जब भी जमीन बेचते हैं या खरीदते हैं तो इस तरह के फैक्ट पता चलते हैं. ऐसे में अगर आपकी भी गांव में कोई जमीन है तो देख लें कि कहीं आपकी जमीन तो किसी और के नाम नहीं है या जमीन को लेकर कोई विवाद तो नहीं है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये खसरा खतौनी होता क्या है और कैसे ये चेक किया जाता है कि आपकी जमीन किसके नाम है?
ये खसरा खतौनी क्या है?
ग्रामीण जमीन के दस्तावेजों में सबसे अहम है खसरा और खतौनी. खसरा का कनेक्शन जमीन के रिकॉर्ड से है. खसरा किसी भी जमीन का रिकॉर्ड होता है. जैसे शहरों में कोई कॉलोनी, प्लॉट नंबर होते हैं, वैसे ही खसरा होता है. हर जमीन के टुकड़े (खेत) का अलग खसरा नंबर होता है. इसमें सब जानकारी होती है, जिसमें जमीन का क्षेत्रफल, फसल डिटेल, कब्जा आदि शामिल है.
वहीं, खतौनी किसी व्यक्ति या परिवार के पास मौजूद जमीन के रिकॉर्ड को कहा जाता है. खतौनी एक मालिक के नाम की होती है, जिसमें उस व्यक्ति के नाम पर जितनी भी जमीन है, उसका रिकॉर्ड रहता है. खतौनी से किसी जमीन पर किसी का मालिकाना हक साबित होता है, जबकि खसरा नंबर किसी जमीन के पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जैसे अगर आपके 2 खेत हैं तो उसमें 2 अलग खसरा रिकॉर्ड होंगे और एक 1 खतौनी होगी, जिसमें दोनों खेत की जानकारी होगी.
कैसे चेक करें अपनी खतौनी?
दरअसल, हर राज्य सरकार ने इन रिकॉर्ड्स के लिए अलग अलग वेबसाइट बना रखी हैं, जो कहीं भूलेख तो कहीं धरा के नाम से है. ऐसे में आप पहले ये पता कर लें कि आपके राज्य में ये किस नाम से है. इसके बाद इस पर लॉगिन करके आप जानकारी हासिल कर सकते हैं.
अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो सबसे पहले भूलेख पोर्टल upbhulekh.gov.in पर जाएं, जहां आपको हर जमीन का रिकॉर्ड मिल जाएगा. इसके बाद जमीन का रिकॉर्ड देखने के लिए खतौनी नकल वाले ऑप्शन पर क्लिक करें. इसके बाद अपने जिले, तहसील का चयन करें और मांगी गई जानकारी भरें.
इसके बाद आप खसरा नंबर, खाता संख्या, खातेदार का नाम, कैटेगरी, नामांतरण की डिटेल से जमीन की जानकारी ले सकते हैं. उनके नंबर या मांगी गई जानकारी लिखने के बाद मांगी गई जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी. आप इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं.
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