3 मई, 1947 को जापान का युद्धोत्तर संविधान लागू हुआ. इस प्रगतिशील संविधान ने सार्वभौमिक मताधिकार प्रदान किया और सम्राट हिरोहितो की लगभग सभी शक्तियां छीन लीं.कुलीन वर्ग को समाप्त कर दिया और जापान के युद्ध करने के अधिकार को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया. यह दस्तावेज मुख्य रूप से सर्वोच्च सहयोगी कमांडर डगलस मैकआर्थर और उनके कब्जा करने वाले कर्मचारियों का काम था, जिन्होंने फरवरी 1946 में जापान के एक प्रयास को अस्वीकार्य माने जाने के बाद इसका मसौदा तैयार किया था.
1941 से 1942 तक फिलीपींस के रक्षक और 1942 से 1945 तक दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र में मित्र देशों की सेनाओं के कमांडर के रूप में, डगलस मैकआर्थर जापान के खिलाफ युद्ध में सबसे सफल अमेरिकी जनरल थे. 2 सितंबर, 1945 को टोक्यो खाड़ी में यूएसएस मिसौरी जहाज पर , उन्होंने जापान के आधिकारिक आत्मसमर्पण की अगुआई की थी.
आत्मसमर्पण की शर्तों के अनुसार, सम्राट हिरोहितो और जापानी सरकार, कब्जे वाले जापान में मित्र देशों की सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के अधिकार के अधीन थे. यह पद जनरल मैकआर्थर द्वारा संभाला गया था.
8 सितंबर को, सर्वोच्च कमांडर मैकआर्थर टोक्यो के खंडहरों से होते हुए कार से अमेरिकी दूतावास पहुंचे, जो अगले साढ़े पांच वर्षों तक उनका निवास स्थान रहा. यह कब्जा नाममात्र के लिए मित्र देशों का अभियान था, लेकिन शीत युद्ध के बढ़ते विभाजन ने जापान को पूरी तरह से अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र में ला दिया था.
मध्य टोक्यो में स्थित शाही महल के सामने स्थित अपने जनरल मुख्यालय से, मैकआर्थर ने अमेरिकी मॉडल के अनुसार जापानी सरकार, उद्योग और समाज के रिकंस्ट्रक्शन को लीड किया. मैकआर्थर एक कुशल प्रशासक थे और उनके प्रगतिशील सुधारों का जापानी जनता ने बड़े पैमाने पर स्वागत किया.
अमेरिकी कब्जे के दौरान किए गए सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक 1889 के मेइजी संविधान के स्थान पर एक नए संविधान की स्थापना थी. 1946 की शुरुआत में, जापानी सरकार ने जनरल हेडक्वार्टर को नए संविधान का एक मसौदा प्रस्तुत किया, लेकिन इसे अत्यधिक रूढ़िवादी होने के कारण अस्वीकार कर दिया गया.
मैकआर्थर ने अपने स्टाफ को एक सप्ताह के भीतर अपना मसौदा तैयार करने का आदेश दिया. 13 फरवरी, 1946 को जापानी सरकार को प्रस्तुत किए गए इस डॉक्यूमेंट में मैकआर्थर ने नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा की और सम्राट को सत्ता से हटा देने के बावजूद उनके अधिकारों को बरकरार रखा गया. साथ ही अनुच्छेद 9 में जापानियों को फिर कभी युद्ध छेड़ने से प्रतिबंधित किया गया.
जापान की पराजय से पहले, सम्राट हिरोहितो को आधिकारिक तौर पर जापान का निरंकुश शासक और दैवीय माना जाता था. हालांकि, व्यवहार में उनकी सत्ता सीमित थी, फिर भी जापानी सरकार उनसे परामर्श करती थी और 1931 से द्वितीय विश्व युद्ध तक उनकी विस्तारवादी नीतियों का समर्थन करती रही. हिरोहितो को उचित कारण से यह भय था कि उन पर युद्ध अपराधी होने का आरोप लगाया जा सकता है और जापानी शाही परिवार को समाप्त किया जा सकता है.
मैकार्थर के संविधान ने कम से कम सम्राट को राज्य और जनता की एकता के प्रतीक के रूप में संरक्षित रखा, इसलिए हिरोहितो ने अपना समर्थन दिया. 10 अप्रैल, 1946 को हुए जनमत संग्रह में नए संविधान को मंजूरी मिल गई, जिससे जापानी महिलाओं को पहली बार मतदान का अधिकार मिला. जापानी सरकार द्वारा थोड़ा संशोधित अंतिम मसौदा एक सप्ताह बाद सार्वजनिक किया गया.
1948 में योशिदा शिगेरू के प्रधानमंत्री चुने जाने के साथ ही योशिदा युग की शुरुआत हुई, जो जापान में राजनीतिक स्थिरता और तीव्र आर्थिक विकास का प्रतीक था. 1949 में मैकआर्थर ने अपनी ताकत और सत्ता जापानी सरकार को सौंप दी.
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