क्या होर्मुज में जहाजों को टोल देना पड़ता है... इस पर किन देशों का हक, कैसे होता है मैनेजमेंट

होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री यातायात बाधित होने की वजह से दुनियाभर में तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है. ईरान लगातार धमकियां दे रहा है और कई कार्गो शिप को निशाना भी बनाया गया है. ऐसे में जानते हैं कि किस हद तक होर्मुज पर ईरान अपना हक रखता है और कैसे इस रास्ते को बाधित कर सकता है. क्या ईरान जहाजों पर टोल या टैक्स लगा सकता है. कौन से कानून ईरान को ऐसा करने से रोकते हैं.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों के गुजरने को लेकर ये हैं नियम-कानून  (Photo - AP) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों के गुजरने को लेकर ये हैं नियम-कानून (Photo - AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध से दुनिया भर में कच्चे तेल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. क्योंकि, ईरान से सटे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कार्गो शिप को भी निशाना बनाया जा रहा है और इस वजह से मिडिल ईस्ट से होने वाले तेल की सप्लाई ठप पड़ गई है. ऐसे में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं कि आखिर  किस देश का इस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कितना हक है? क्या होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को कोई टैक्स देना पड़ता है और  कैसे इस स्ट्रेट का मैनेजमेंट होता है?

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होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के टैंकरों के लिए पर्याप्त गहरा है और इसका इस्तेमाल मिडिल ईस्ट के प्रमुख तेल और गैस उत्पादकों - और उनके ग्राहकों द्वारा किया जाता है. इस रास्ते से तेल और गैस न केवल ईरान से आता है, बल्कि इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अन्य खाड़ी देशों से भी आता है.

किस देश का कितना हक
संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार, देश अपनी तटरेखा से 12 समुद्री मील (13.8 मील) तक के प्रादेशिक समुद्रों पर नियंत्रण रख सकते हैं.अपने सबसे संकरे बिंदु पर, होर्मुज जलडमरूमध्य और इसके जहाजरानी मार्ग पूरी तरह से ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र के भीतर स्थित हैं. ऐसे में इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा और शिपिंग ट्रैफिक की सुगमता की जिम्मेदारी भी इन्हीं दो देशों की होती है.

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कैसे होता है इस स्ट्रेट का मैनेजमेंट
होर्मुज स्ट्रेट का प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS)के तहत ईरान, ओमान और अमेरिकी नौसेना की सैन्य निगरानी के संयोजन के माध्यम से की जाती है.संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन या UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) के तहत ईरान अपनी तटरेखा से 12 समुद्री मील (14 मील) तक अपनी संप्रभुता का इस्तेमाल कर सकता है. यह दूरी होर्मुज स्ट्रेट के सबसे संकरे बिंदु से भी कम है.

 UNCLOS के मुताबिक, ईरान को अपने जलक्षेत्रों से विदेशी जहाजों के सुरक्षित आवागमन या ट्रांजिट पैसेज की अनुमति देनी होगी. ईरान इंटरनेशनल नेविगेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इस होर्मुज मार्ग से ट्रांजिट पैसेज में बाधा नहीं डाल सकता है. ईरान ने 1982 में UNCLOS के इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसे देश की संसद ने इसे अनुमोदित नहीं किया.

क्या होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को कोई टैक्स देना पड़ता है
होर्मुज स्ट्रेट एक इंटरनेशनल समुद्री मार्ग है और इसके दोनों तरफ अलग-अलग देश हैं. इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के मुताबिक, इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लगता है. 

फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की संसद से एक विधेयक पास करने की बात हो रही है जो  ईरान को स्ट्रेट ऑफर होर्मुज में जहाजों से टोल वसूलने की अनुमति देगा. क्योंकि,  यह स्ट्रेट अपने सबसे संकरे बिंदु पर केवल 21 मील चौड़ा है और इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज को ईरानी क्षेत्रीय जल से होकर गुजरना पड़ता हैं.

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 ईरानी समाचार रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि ईरानी सरकार का दावा है कि टोल से अमेरिका से मिल रही धमकियों के खिलाफ ईरान द्वारा प्रदान की गई "सुरक्षा" की लागत की भरपाई हो सकती है, लेकिन वास्तव में ईरान ऐसा नहीं कर रहा है. 

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों नहीं लग सकता टैक्स
ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों व जहाजों पर टोल नहीं लगा सकता. यह स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. टोल  स्वेज नहर या  पनामा नहर जैसे मानव निर्मित जलमार्गों पर लगाए जाते हैं , जिनके दोनों ओर एक ही देश स्थित होता है. अगर ईरान इसमें हस्तक्षेप करने की कोशिश करता है या टोल लगाता है तो कई देशों की सैन्य शक्तियां हस्तक्षेप करने के लिए तैयार होंगी और ईरान का ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा.

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