आज के दिन 7 मार्च 1938 को हिटलर ने वर्साय की संधि का उल्लंघन कर राइनलैंड पर पर दोबारा कब्जा कर लिया था. नाजी नेता एडॉल्फ हिटलर ने पश्चिमी जर्मनी में राइन नदी के किनारे स्थित एक डिमिलिट्राइज्ड एरिया, राइनलैंड में जर्मन सेना को भेजकर वर्साय की संधि और लोकार्नो संधि का उल्लंघन किया था. हिटलर ने राइनलैंड को कब्जे में लेकर वर्साय की संधि को नहीं मानने अपनी मंशा जता दी थी और यहीं से दूसरे विश्वयुद्ध का रास्ता तैयार हो गया था.
प्रथम विश्व युद्ध के समाप्त होने के आठ महीने बाद, जुलाई 1919 में हस्ताक्षरित वर्साय की संधि में पराजित जर्मनी के लिए भारी युद्ध क्षतिपूर्ति और अन्य कठोर शांति शर्तों का प्रावधान था. इस संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने शांति सम्मेलन में औपचारिक कलम तोड़कर अपना रुख स्पष्ट किया था.
वर्साय की संधि के अनुसार, जर्मनी की सैन्य शक्ति को नगण्य कर दिया गया और राइनलैंड को डिमिलिट्राइज्ड कर दिया गया था. 1925 में, स्विट्जरलैंड में आयोजित यूरोपीय शांति सम्मेलन के समापन पर, लोकार्नो संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसने वर्साय की संधि द्वारा तय की गई राष्ट्रीय सीमाओं की पुष्टि की और राष्ट्र संघ में जर्मनी के प्रवेश को मंजूरी दी.
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1930 तक जर्मन विदेश मंत्री गुस्ताव स्ट्रेसमैन ने विसैन्यीकृत राइनलैंड से अंतिम मित्र देशों की सेनाओं को हटाने के लिए बातचीत की. हालांकि, महज चार साल बाद, एडॉल्फ हिटलर और नाजी पार्टी ने जर्मनी में पूर्ण सत्ता हथिया ली और उन मित्र राष्ट्रों से बदला लेने का वादा किया, जिन्होंने जर्मन जनता पर वर्साय की संधि थोपी थी.
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1935 में, हिटलर ने एकतरफा रूप से संधि के सैन्य प्रावधानों को रद्द कर दिया और मार्च 1936 में लोकार्नो संधि की निंदा करते हुए राइनलैंड का पुनः सैन्यीकरण शुरू कर दिया. दो साल बाद, यानी 1938 नाजी जर्मनी ने अपने क्षेत्रों का विस्तार किया और ऑस्ट्रिया तथा चेकोस्लोवाकिया के कुछ हिस्सों को अपने में मिला लिया. इसी दौरान राइनलैंड को भी अपने कब्जे में ले लिया था. इसके एक साल बाद 1939 में, हिटलर ने पोलैंड पर आक्रमण किया, जिससे यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध की आग भड़क उठी थी.
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