जब दुनिया की पहली गर्भनिरोधक गोली को मिली मंजूरी, दशकों चल था प्रयोग

आज के दिन ही फैमिली प्लानिंग और बर्थ कंट्रोल जैसे मुद्दे को लेकर एक क्रांतिकारी घटना हुई थी. जब अमेरिका में पहली बार गर्भ निरोधक गोलियों के उत्पादन को मंजूरी मिली और यह बाद में लोगों के लिए बाजर में उपलब्ध हो सकी.

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1960 में गर्भ निरोधक गोलियों के उत्पादन को मंजूरी मिली थी (Photo - Pexels) 1960 में गर्भ निरोधक गोलियों के उत्पादन को मंजूरी मिली थी (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

9 मई 1960 को दुनिया की पहली गर्भ निरोधक गोली व्यावसायिक रूप से बाजार में उपलब्ध हुई थी.  जब अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स एसोसिएशन (एफडीए) ने शिकागो, इलिनोइस की जीडी सियरल कंपनी द्वारा निर्मित दुनिया की पहली व्यावसायिक रूप से उत्पादित गर्भनिरोधक गोली - एनोविड-10 को मंजूरी दी.

गर्भनिरोधक गोलियों के विकास की शुरुआत गर्भनिरोध के सेक्टर में सबसे की पायोनियर मानी जाने वाली मार्गरेट सैंगर ने की थी और इस काम को फाइनेशियल सपोर्ट उनकी उत्तारधिकारी कैथरीन मैककॉर्मिक ने किया था.सैंगर, जिन्होंने 1916 में संयुक्त राज्य अमेरिका में पहला गर्भनिरोध क्लिनिक खोला था, उस समय इस्तेमाल में आने वाले गर्भनिरोधकों के अधिक व्यावहारिक और प्रभावी विकल्प के विकास को प्रोत्साहित करने की आशा रखती थीं.

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1950 के दशक की शुरुआत में, वॉर्सेस्टर फाउंडेशन फॉर एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी के जैव रसायनज्ञ ग्रेगरी पिंकस और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के स्त्री रोग विशेषज्ञ जॉन रॉक ने गर्भनिरोधक गोली पर काम शुरू किया. 

महिलाओं में ओव्यूलेशन को रोकने के लिए सिंथेटिक प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का उपयोग करने वाली इस गोली के टेस्ट 1954 में शुरू किए गए. 9 मई, 1960 को एफडीए ने गोली को मंजूरी दे दी, जिससे अमेरिकी महिलाओं को गर्भधारण करने संबंधी मामले में अधिक आजादी मिल गई.

गर्भनिरोधक गोली तैयार करना सिर्फ बर्थ कंट्रोल के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम नहीं था. इसने महिलाओं की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव लाया. इससे पहले क्लिनिकली इतनी आसानी से अनचाहे प्रेग्नेंसी से बचने का कोई कारगर उपाय नहीं था. यह न केवल महिलाओं, बल्कि परिवारों में भी खुशियां लेकर आया. बच्चों के बीच अंतर और फैमिली प्लानिंग कर पाना लोगों के लिए आसान हो गया. फैमिली प्लानिंग के साथ- साथ लोगों को परिवार की वित्तीय प्लानिंग में भी मदद मिली. वैसी महिलाएं जो पढ़ाई, करियर,  पेशेवर जीवन के साथ- साथ अपनी शादीशुदा जिंदगी के बीच बैलेंस बनाने को लेकर सिर्फ अनचाहे प्रेग्नेंसी की वजह से लेकर मुश्किल में थी. उनके लिए जिंदगी काफी आसान हो गई.  

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