मैं क्या लेने आया था... कमरे या फ्रिज का दरवाजा खोलकर आप भी हो जाते हैं 'Lost', जानें कारण

कई बार हम कमरे में जाकर भूल जाते हैं कि क्या लेने आए थे. जब दिमाग पर ज्यादा दबाव होता है, तब वह जरूरी और गैर-जरूरी जानकारी को जल्दी-जल्दी हटाने लगता है. इसी वजह से हम ज्यादा भूलने लगते हैं.

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तनाव के समय हम ज्यादा चीजें भूलने लगते हैं, जैसे कि क्या लेने गए थे या क्या काम करना था. ( Photo: Pexels) तनाव के समय हम ज्यादा चीजें भूलने लगते हैं, जैसे कि क्या लेने गए थे या क्या काम करना था. ( Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

कई बार हम किसी काम से दूसरे कमरे में जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचते ही भूल जाते हैं कि क्या करने आए थे. इसे विज्ञान में ‘डोरवे इफेक्ट’ कहा जाता है. जब हम एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, तो हमारा दिमाग खुद को नए माहौल के हिसाब से बदल लेता है और पुरानी जानकारी को पीछे छोड़ देता है. इसी वजह से हमें अचानक याद नहीं रहता कि हम क्या लेने या करने आए थे. यह कोई बीमारी या याददाश्त की कमजोरी नहीं है, बल्कि दिमाग की एक सामान्य प्रक्रिया है. हालांकि, जब हम थके हुए होते हैं, तनाव में होते हैं या एक साथ कई काम कर रहे होते हैं, तो यह समस्या ज्यादा महसूस होती है. ऐसे में छोटे-छोटे तरीके जैसे खुद से बोलते रहना या चीजों की कल्पना करना हमारी मदद कर सकते हैं.

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साइकेट्रिस्ट विंदा सिंह कहती हैं कि अक्सर हमारा मन स्थिर नहीं रहता, या किसी काम में रुचि नहीं होती हैं, तो कभी कभी, कोई चीज या काम के लिए दूसरे रूम में जाते है, तो एक दम से लगता है अरे किस काम से आए थे, फिर बहुत बार सोचते है तो काम या चीजें जिसके लिए आए थे ओ याद आ जाती हैं, जो चीजें बहुत पसंद नहीं या जो काम पसंद नहीं, उसे अक्सर भूल जाते. हम एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते हैं, तो हमारा दिमाग नई जगह के हिसाब से खुद को बदल लेता है. इसे आसान भाषा में समझें तो दिमाग 'रीसेट' हो जाता है.

दिमाग भी बेकार जानकारी हटा देता है
विंदा सिंह बताती हैं कि नई जगह पर पहुंचते ही दिमाग पुरानी बातों को हटाकर नई चीजों पर ध्यान देने लगता है. इसी वजह से हम भूल जाते हैं कि हम क्या लेने आए थे. आप अपने दिमाग को मोबाइल फोन की तरह समझ सकते हैं. जैसे हम फोन में बेकार ऐप्स बंद कर देते हैं ताकि फोन सही से चले, वैसे ही दिमाग भी बेकार जानकारी हटाता रहता है. जब आप नए कमरे में जाते हैं, तो दिमाग सोचता है कि अब नया काम शुरू होगा, इसलिए पुरानी बात हट जाती है.

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कब ज्यादा भूलते हैं?
अक्सर यह समस्या तब ज्यादा होती है, जब हमारा दिमाग पहले से ही थका हुआ या व्यस्त होता है. उदाहरण के लिए, अगर आप पूरे दिन काम करने के बाद थक चुके हैं, तो दिमाग की फोकस करने की क्षमता कम हो जाती है. ऐसे में जब आप एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते हैं, तो दिमाग नई जानकारी को संभाल नहीं पाता और पुरानी बात जल्दी भूल जाती है. तनाव भी एक बड़ा कारण है. जब हम किसी चिंता या दबाव में होते हैं, तो दिमाग एक ही समय में कई चीजों के बारे में सोच रहा होता है. इससे ध्यान बंट जाता है और छोटी-छोटी बातें याद रखना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि तनाव के समय हम ज्यादा चीजें भूलने लगते हैं, जैसे कि क्या लेने गए थे या क्या काम करना था.

इसके अलावा, जब हम एक साथ कई काम कर रहे होते हैं, तब भी यह समस्या बढ़ जाती है. जैसे फोन पर बात करते हुए किचन जाना, या किसी चीज के बारे में सोचते हुए दूसरे कमरे में जाना. ऐसे में दिमाग पूरी तरह किसी एक काम पर फोकस नहीं कर पाता. नतीजा यह होता है कि जैसे ही हम नई जगह पहुंचते हैं, दिमाग कंफ्यूज हो जाता है और पहले वाला काम याद से निकल जाता है.

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कैसे याद रखें?
अगर आप इसे कम करना चाहते हैं, तो ये आसान तरीके अपनाएं:

  • जो चीज लेने जा रहे हैं, उसकी तस्वीर दिमाग में सोचें.
  • रास्ते में खुद से बोलते रहें कि क्या काम है.
  • कमरे में घुसने से पहले एक सेकंड रुक कर याद करें.
  • हाथ में कोई छोटी चीज रखें, जो आपको काम याद दिलाए.

क्या यह बीमारी है?
नहीं, यह बिल्कुल सामान्य बात है. हर किसी के साथ ऐसा होता है.लेकिन अगर आप बार-बार जरूरी चीजें जैसे नाम, काम या मीटिंग्स भूलने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना सही रहेगा. कुल मिलाकर, कमरे में जाकर काम भूल जाना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि दिमाग की एक स्मार्ट आदत है.

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