7 अप्रैल 1954 राष्ट्रपति आइजनहावर ने शीत युद्ध का 'डोमिनो सिद्धांत' प्रस्तुत किया. इसके जरिए अमेरिका की वियतनाम वॉर में इंट्री हुई. राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर ने कहा था कि कम्युनिस्टों द्वारा फ्रांसीसी इंडोचीन पर कब्जा करने से दक्षिण पूर्व एशिया में "डोमिनो" प्रभाव उत्पन्न हो सकता है. यह डोमिनी थ्योरी ही अगले दो दशक तक अमेरिका और वियतनाम के बीच भीषण रक्तपात की वजह बनी.
डोमिनो सिद्धांत शीत युद्ध के दौरान अपनाई गई एक नीति थी, जिसके अनुसार एक राष्ट्र में कम्युनिस्ट सरकार बनने से पड़ोसी राज्यों में भी जल्दी ही कम्युनिस्ट सत्ता आ जाएगी और वे एक के बाद एक गिरते चले जाएंगे. दक्षिण-पूर्व एशिया में, अमेरिकी सरकार ने वियतनाम युद्ध में अपनी भागीदारी और दक्षिण वियतनाम में एक गैर-कम्युनिस्ट तानाशाह के समर्थन को उचित ठहराने के लिए इस सिद्धांत का इस्तेमाल किया, जिसे अब अमान्य माना जा चुका है.
1954 की शुरुआत तक, कई अमेरिकी नीति निर्माताओं को यह स्पष्ट हो गया था कि फ्रांस इंडोचीन (वियतनाम) में औपनिवेशिक नियंत्रण को पुनः स्थापित करने के अपने प्रयास में विफल हो रहा था, जिसे उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानियों द्वारा क्षेत्र पर कब्ज़ा करने के बाद खो दिया था. कम्युनिस्ट हो ची मिन्ह के नेतृत्व में वियतनामी राष्ट्रवादी, डिएन बिएन फू की लड़ाई में फ्रांसीसी सेनाओं के खिलाफ एक शानदार जीत हासिल करने के कगार पर थे. बाद में कम्युनिस्टों की जीत भी हुई.
तभी फ्रांसीसियों को अमेरिकी सहायता बढ़ाने के लिए कांग्रेस और जनता का समर्थन जुटाने के प्रयास में, राष्ट्रपति आइजनहावर ने 7 अप्रैल, 1954 को एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और डोमिनो थ्योरी पेश की. इसमें बताया गया कि कम्युनिस्ट की जीत के साथ कैसे डोमिनो प्रभाव उस पूरे इलाके में सक्रिय हो जाएगा और पूरी मानवजाति इसके चपेट में आकर नष्ट हो जाएगी.
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आइजनहावर ने इसे ऐसे समझाया और कहा कि मान लीजिए डोमिनो की एक पंक्ति लगी है, आप पहले डोमिनो को गिराते हैं, और अंतिम डोमिनो का क्या होगा यह निश्चित है कि वह बहुत जल्दी गिर जाएगा. इसी तरह इंडोचीन (वियतनाम) में कम्युनिस्ट जीत के साथ दक्षिण पूर्व एशिया का विघटन होना शुरू हो जाएगा.
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