दही जमाने वाला पत्थर... कौन सा है वो स्टोन, जिसे दूध में डालते हैं लोग?

दही जमाने वाला पत्थर एक पारंपरिक तरीका है, जिसमें खास खनिज और प्राकृतिक बैक्टीरिया की मदद से दूध दही में बदल जाता है. यह जामन की तरह ही काम करता है, लेकिन इसमें अलग माध्यम इस्तेमाल होता है. हालांकि आज इसका इस्तेमाल कम होता है.

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करीब 10–12 घंटे में दूध गाढ़ा और क्रीमी दही बन जाता है. ( Photo: AI) करीब 10–12 घंटे में दूध गाढ़ा और क्रीमी दही बन जाता है. ( Photo: AI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

हम सभी जानते हैं कि दही जमाने के लिए आमतौर पर थोड़ा सा पुराना दही (जामन) दूध में मिलाया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि सिर्फ एक पत्थर से भी दही जमाया जा सकता है? सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन यह सच है. भारत के कुछ इलाकों में एक खास तरह के पत्थर का इस्तेमाल दही जमाने के लिए किया जाता है. इस पत्थर को आम बोलचाल में दही जमाने वाला पत्थर कहा जाता है. इसका नाम हाबूर स्टोन है. असल में यह कोई जादुई चीज नहीं है, बल्कि इसके पीछे साइंस छिपा हुआ है. यह हाबूर स्टोन खास तरह के मिनरल्स से बना होता है, जो दूध को दही में बदलने में मदद करते हैं.

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आपको बता दें कि हाबूर स्टोन एक खास तरह का पीले रंग का पत्थर है, जो राजस्थान के जैसलमेर के आसपास मिलता है. इस पत्थर की सबसे खास बात यह है कि इससे बिना जामन डाले भी दूध दही में बदल जाता है.यह पत्थर प्राकृतिक रूप से दही जमाने में मदद करता है. लोग इसे छोटे-छोटे टुकड़ों, पिरामिड या बर्तन के रूप में इस्तेमाल करते हैं. जब इसे गुनगुने दूध में रखा जाता है, तो करीब 10–12 घंटे में दूध गाढ़ा और क्रीमी दही बन जाता है.

कैसे काम करता है यह पत्थर?
जब गर्म दूध में इस पत्थर का छोटा सा टुकड़ा डाला जाता है, तो उसमें मौजूद प्राकृतिक बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं. यही बैक्टीरिया दूध को खट्टा बनाकर उसे दही में बदल देते हैं. यानी जिस तरह हम दही जमाने के लिए जामन का इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह यह पत्थर भी बैक्टीरिया का काम करता है.

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कहां मिलता है यह पत्थर?
यह पत्थर आमतौर पर पहाड़ी या खास खनिज वाले इलाकों में पाया जाता है. हर पत्थर से दही नहीं जमता, बल्कि सिर्फ कुछ खास पत्थरों में ही यह गुण होता है. इसलिए यह हर जगह आसानी से नहीं मिलता और लोगों के लिए यह थोड़ा खास माना जाता है.

क्या यह सुरक्षित है?
अगर सही और साफ पत्थर का इस्तेमाल किया जाए, तो यह आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है. लेकिन बिना जानकारी के किसी भी पत्थर को दूध में डालना सही नहीं है, क्योंकि उसमें हानिकारक तत्व भी हो सकते हैं. इसलिए ऐसे प्रयोग सोच-समझकर और जानकारी के साथ ही करने चाहिए.

क्या आज भी लोग इसका इस्तेमाल करते हैं?
आज के समय में ज्यादातर लोग दही जमाने के लिए पुराना दही ही इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि यह आसान और भरोसेमंद तरीका है. लेकिन कुछ ग्रामीण इलाकों या परंपरागत जगहों पर अभी भी इस पत्थर का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक तरह से पुरानी परंपरा का हिस्सा है.

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