19 मई 1943 को, ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने एक साथ इंग्लिश चैनल पार कर जर्मनी के कब्जे वाले इलाकों पर हमला करने की योजना बनाई, जो कि डी-डे के रूप में जानी गई. 1 मई 1944 को डी-डे हमला होना था. हालांकि, यह तारीख थोड़ी जल्दबाजी साबित हुई, क्योंकि खराब मौसम बाधा बन गया. आखिरकार, डी-डे आक्रमण 6 जून, 1944 को हुआ.
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, 6 जून, 1944 को उत्तरी फ्रांस के नॉर्मंडी तट पर संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों की सेनाओं ने एक साथ हमला किया था. इसे डी-डे हमला नाम दिया गया था. इस डी-डे हमले की प्लानिंग 19 मई 1943 को ही हो गई थी.
1943 में ब्रिटेन में कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए चर्चिल ने चेतावनी दी कि वर्तमान में असली खतरा भारी खर्च पर युद्ध को लंबा खींचना है. क्योंकि इससे मित्र राष्ट्रों के थक जाने, ऊब जाने या विभाजित हो जाने का जोखिम है और वे जर्मनी और जापान के हाथों की कठपुतली बन सकते हैं. इसलिए उन्होंने धुरी शक्तियों के कमजोर बिंदुओं पर जल्दी और बड़े हमले का समर्थन किया.
इसलिए, प्रक्रिया को तेज करने के लिए, ब्रिटिश प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति रूज़वेल्ट ने उत्तरी फ्रांस के नॉरमैंडी में इंग्लिश चैनल पार करके आक्रमण की प्लानिंग की. 19 मई को डी- डे हमले की योजना बनाई गई और इसके लिए 1 मई, 1944 की तारीख तय कर दी गई. भले ही इटली पर आक्रमण जारी था और उससे कई समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं. यह हमला 29 डिवीजनों द्वारा किया जाना था, जिसमें संभव होने पर एक स्वतंत्र फ्रांसीसी डिवीजन भी शामिल था.
उस समय फ्रांस पर नाजी जर्मनी की सेनाओं का कब्जा था और ऑपरेशन ओवरलॉर्ड नामक इस जल-थल आक्रमण के परिणामस्वरूप, दिन के अंत तक लगभग 156,000 मित्र देशों के सैनिक नॉर्मंडी के तट पर उतर गए थे. अपनी सफलता के बावजूद, समुद्र तटों की रक्षा कर रहे जर्मन सैनिकों द्वारा लगभग 4,000 मित्र देशों के सैनिक मारे गए.
उस समय, डी-डे आक्रमण इतिहास का सबसे बड़ा नौसैनिक, हवाई और थल अभियान था, और कुछ ही दिनों में लगभग 326,000 सैनिक, 50,000 से अधिक वाहन और लगभग 100,000 टन उपकरण उतारे गए थे. अगस्त 1944 तक, उत्तरी फ्रांस का पूरा क्षेत्र मुक्त हो चुका था, और 1945 के वसंत में मित्र देशों ने जर्मनों को हरा दिया था. इतिहासकार अक्सर डी-डे को द्वितीय विश्व युद्ध के अंत की शुरुआत मानते हैं.
6 जून की सुबह तक, हजारों पैराट्रूपर्स और ग्लाइडर सैनिक दुश्मन की सीमा रेखा के पीछे उतर चुके थे और पुलों व निकास मार्गों को सुरक्षित कर रहे थे. जल-थल आक्रमण सुबह 6:30 बजे शुरू हुआ. ब्रिटिश और कनाडाई सैनिकों ने हल्के प्रतिरोध का सामना करते हुए गोल्ड, जूनो और स्वॉर्ड नामक समुद्र तटों पर कब्जा कर लिया, जैसा कि अमेरिकियों ने यूटा बीच पर किया था.
ओमाहा बीच पर अमेरिकी सेना को भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. जहां 2,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक हताहत हुए. हालांकि, दिन के अंत तक, लगभग 156,000 मित्र देशों के सैनिकों ने नॉर्मंडी के समुद्र तटों पर सफलतापूर्वक धावा बोल दिया था.
एक सप्ताह से भी कम समय बाद, 11 जून को, समुद्र तटों को पूरी तरह से सुरक्षित कर लिया गया था और 326,000 से अधिक सैनिक, 50,000 से अधिक वाहन और लगभग 100,000 टन उपकरण नॉर्मंडी में उतर चुके थे.दूसरी ओर, जर्मन सेना में आंतरिक कलह और प्रसिद्ध कमांडर रोमेल की अनुपस्थिति का खामियाजा भुगतना पड़ा, जो छुट्टी पर थे.
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