प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई अपील के बाद अब वर्क फ्रॉम होम की चर्चा होने लगी है. सोशल मीडिया पर कंपनियों की ओर से वर्क फ्रॉम होम न दिए जाने को लेकर मीम शेयर किए जा रहे हैं. कई लोग इस अपील के बाद वर्क फ्रॉम होम की मांग कर रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या कोई कंपनी वर्क फ्रॉम होम के लिए इनकार कर सकती है? तो समझते हैं वर्क फ्रॉम होम को लेकर कर्मचारी के पास क्या‑क्या अधिकार हैं.
क्या है कानून?
अभी तक भारत के श्रम कानून कर्मचारियों को घर से काम करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं देते हैं. ऐसे प्रावधान रोजगार अनुबंध, कंपनी/एचआर पॉलिसी, कर्मचारी और कंपनी के बीच के एग्रीमेंट या किसी सरकारी अधिसूचना के माध्यम से नियंत्रित किए जाते हैं. कंपनी के पास आम तौर पर यह अधिकार होता है कि वह भारतीय अनुबंध कानून के आधार पर उपस्थिति नियम और कर्मचारी का कार्यस्थल तय करे.
डेकन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में व्हाइट‑कलर नौकरियों के लिए कुछ कानून हैं, जो काम के घंटे, छुट्टियां, ओवरटाइम और वर्कप्लेस की परिस्थितियों को नियंत्रित करते हैं. हालांकि, इनमें से किसी में भी अभी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का अधिकार नहीं दिया गया है.
नए लेबर कोड्स में क्या कहा गया है?
केंद्र सरकार ने चार श्रम कोडों को पूरी तरह लागू कर दिया है, जिनमें न्यूनतम मजदूरी और सभी श्रमिकों के लिए नियम तय किए गए हैं. नए कोड्स में पहली बार रिमोट वर्क और हाइब्रिड वर्क को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है, लेकिन कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम का कोई अधिकार उल्लेखित नहीं है. ऐसे में यह पॉलिसी का हिस्सा है, पर अधिकार नहीं. कंपनी तय करती है कि वर्क फ्रॉम होम दिया जाए या नहीं.
कोविड में क्या हुआ था?
कोविड‑19 महामारी वर्क फ्रॉम होम के वैश्विक अपनाने का पहला उदाहरण थी, ताकि कोरोना वायरस के फैलने को रोका जा सके. महामारी के दौरान केंद्रीय और राज्य सरकारों ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू किया था, जिसमें वर्क फ्रॉम होम को कानूनी रूप से मान्यता दी गई थी. गृह मंत्रालय ने भी बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनमें कहा गया था कि जहां संभव हो, कार्यालयों को रिमोट तरीके से काम करना चाहिए.
हालांकि, कुछ परिस्थितियों में कर्मचारी कंपनी से संभव हो तो वर्क फ्रॉम होम की मांग कर सकते हैं, जिसमें प्रेग्नेंसी आदि शामिल हैं. वहीं, कंपनी भी कानूनी रूप से कर्मचारियों से ऑफिस से काम करने को कह सकती है. ऐसे में आसान शब्दों में कहें तो वर्क फ्रॉम होम का निर्णय कंपनी के पास होता है और वह अपने हिसाब से इसे लागू कर सकती है, जब तक कि कोई खास कॉन्ट्रैक्ट या समझौता न किया गया हो.
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