ऐसे हुआ था 'नीली जींस' का जन्म, जब खदान मजदूरों के लिए बनाया गया टिकाऊ पैंट

आज के दिन ही सबसे पॉपुलर परिधानों में एक 'ब्लू जींस' का जन्म हुआ था. जींस की कहानी भी काफी दिलचस्प है. कभी इसे सोने की खान में काम करने वाले श्रमिकों के लिए बनाया गया था.

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ऐसे फैशन में आया था ब्लू जींस (Photo - Pexels) ऐसे फैशन में आया था ब्लू जींस (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

20 मई 1873 को सैन फ्रांसिस्को के व्यवसायी लेवी स्ट्रॉस और नेवादा के दर्जी जैकब डेविस को धातु के रिवेट्स से मजबूत किए गए खानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए एक मजबूत और टिकाऊ पैंट बनाने का पेटेंट दिया गया. आगे चलकर यही पैंट  दुनिया के सबसे फेमस और तहलका मचाने वाले परिधानों में से एक, 'नीली जींस' बन गया. इस तरह यह सिर्फ एक कामगारों के लिए एक ड्रेस के लिए पेटेंट मिलने की कहानी भर नहीं था, बल्कि 'नीली जींस' के जन्म का इतिहास बन गया. 

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सैन फ्रांसिस्को में लेवी स्ट्रॉस ने अपने नाम से थोक सूखे सामान का व्यवसाय शुरू किया. लेकिन, वह अपने परिवार की कंपनी के रिप्रेजेंटेटिव के रूप में ही काम करता था. उनका नया कारोबार कैलिफोर्निया और अन्य पश्चिमी राज्यों में खुल रही छोटी दुकानों में बेचने के लिए कपड़े, फ़ैब्रिक और अन्य सूखे सामान आयात करता था, ताकि सोने की खानों में काम करने वाले मजदूरों की तेजी से बढ़ती आबादी को टिकाऊ कपड़ों आपूर्ति की जा सके.

नेवादा के रेनो डेविस में रहने वाले एक दर्जी, जैकब डेविस, लेवी स्ट्रॉस के नियमित ग्राहकों में से एक थे. 1872 में, उन्होंने स्ट्रॉस को एक पत्र लिखकर अपनी उस विधि के बारे में बताया जिसमें वे खदानों में काम करने वाले मजदूरों के पैंट को अधिक मजबूत बनाने के लिए जेबों के कोनों और बटन वाली पट्टी के निचले हिस्से जैसे  बिंदुओं पर धातु के रिवेट लगाते थे. 

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चूंकि, डेविस के पास आवश्यक कागजी कार्रवाई के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि स्ट्रॉस ही पैसे मुहैया कराएं और दोनों मिलकर पेटेंट करवा लें. स्ट्रॉस ने उत्साहपूर्वक सहमति जताई और जेब के खुलने वाले हिस्सों को 'बांधने की विधि में सुधार' का पेटेंट कराया. इस इनोवेशन को आज हम 'ब्लू जींस' के नाम से  जानते हैं. यानी आज जो हम जींस पहनते हैं. इसका  जन्म - 20 मई, 1873 को हुआ, जब  दोनों को इसका पेटेंट प्रदान किया गया.

स्ट्रॉस, डेविस को सैन फ्रांसिस्को ले आए ताकि वे "कमर वाले ओवरऑल" (जिसे मूल जींस के नाम से जाना जाता था) के पहले मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र की देखरेख कर सकें. शुरुआत में, उन्होंने घर से काम करने वाली सिलाई करने वाली महिलाओं को काम पर रखा, लेकिन 1880 के दशक तक, स्ट्रॉस ने अपना खुद का कारखाना खोल लिया था.

 मशहूर 501 ब्रांड की जींस—जिसे 1890 तक "XX" के नाम से जाना जाता था—जल्द ही सबसे ज्यादा बिकने वाली बन गई और कंपनी तेजी से बढ़ी. 1920 के दशक तक, लेवी की डेनिम कमर वाली ओवरऑल अमेरिका में पुरुषों की सबसे ज्यादा बिकने वाली काम की पैंट बन गई थी. जैसे-जैसे दशक बीतते गए, इसका क्रेज बढ़ता ही गया और आज नीली जींस दुनिया भर में बूढ़े, जवान और हर उम्र के लोगों द्वारा पहनी और पसंद की जाती है.

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