आयुष्मान कार्ड से किन-किन बीमारियों का पैसा नहीं मिलता है?

आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है, लेकिन हर इलाज और हर खर्च इसमें शामिल नहीं होता. OPD, सामान्य जांच, कॉस्मेटिक सर्जरी और कई दूसरी सेवाओं का पैसा मरीज को खुद देना पड़ सकता है.

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आयुष्मान भारत योजना का फायदा केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को ही मिलता है. ( Photo: AI) आयुष्मान भारत योजना का फायदा केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को ही मिलता है. ( Photo: AI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:44 PM IST

बीमारी कभी बताकर नहीं आती. एक गंभीर बीमारी या अचानक अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में आम आदमी की सारी जमा पूंजी खत्म हो सकती है. इसी परेशानी को कम करने के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी. इस योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाता है. देश के करोड़ों लोग इस योजना का फायदा उठा रहे हैं. लेकिन बहुत से लोगों को यह गलतफहमी होती है कि आयुष्मान कार्ड बन जाने के बाद हर तरह का इलाज पूरी तरह मुफ्त हो जाता है. जबकि सच यह है कि इस योजना के भी कई नियम और सीमाएं हैं. कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका खर्च मरीज को खुद उठाना पड़ सकता है. अगर इन नियमों की जानकारी नहीं हो, तो अस्पताल में बड़ा बिल देखकर परेशानी बढ़ सकती है.

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सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आयुष्मान योजना केवल अस्पताल में भर्ती होने पर ही काम करती है. अगर कोई व्यक्ति सामान्य बुखार, सिरदर्द, खांसी या हल्की बीमारी के लिए डॉक्टर के पास जाता है, तो उसका खर्च इस योजना में शामिल नहीं होता. यानी बिना भर्ती हुए डॉक्टर की फीस, क्लिनिक विजिट या सामान्य जांच का पैसा मरीज को खुद देना पड़ता है. उदाहरण के लिए अगर आप सिर्फ ब्लड टेस्ट, एक्स-रे या सामान्य चेकअप कराने अस्पताल जाते हैं और भर्ती नहीं होते, तो उसका खर्च आयुष्मान कार्ड से कवर नहीं होगा.

सिर्फ भर्ती होने पर मिलता है फायदा
इसके अलावा रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई दवाइयों का खर्च भी इस योजना में शामिल नहीं है. विटामिन, कैल्शियम, टॉनिक और सामान्य सप्लीमेंट्स जैसी चीजों के पैसे मरीज को अपनी जेब से देने पड़ते हैं. कई लोग सोचते हैं कि अस्पताल से मिलने वाली हर दवा मुफ्त होगी, लेकिन ऐसा नहीं है. सरकार सिर्फ जरूरी और गंभीर इलाज से जुड़ी दवाओं का खर्च उठाती है. कॉस्मेटिक और सुंदरता बढ़ाने वाली सर्जरी भी आयुष्मान योजना के दायरे से बाहर हैं. अगर कोई व्यक्ति सिर्फ चेहरा सुंदर बनाने, स्किन ट्रीटमेंट कराने या प्लास्टिक सर्जरी करवाने के लिए अस्पताल जाता है, तो उसका खर्च खुद उठाना होगा. इसी तरह दांतों की सामान्य सफाई, कैविटी फिलिंग और कई छोटे डेंटल ट्रीटमेंट भी मुफ्त इलाज में शामिल नहीं हैं. टेस्ट ट्यूब बेबी यानी IVF का खर्च भी सरकार नहीं देती.

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यह योजना हर व्यक्ति के लिए नहीं बनाई गई है. आयुष्मान भारत योजना का फायदा केवल आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों को ही मिलता है. अगर कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी करता है, इनकम टैक्स भरता है, उसका पीएफ कटता है या वह ESIC जैसी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले रहा है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं माना जाता. इसलिए अस्पताल जाने से पहले यह जांच लेना जरूरी है कि आपका नाम योजना की सूची में है या नहीं. कई बार लोग बिना जानकारी के किसी भी निजी अस्पताल में पहुंच जाते हैं और बाद में पता चलता है कि वहां आयुष्मान कार्ड मान्य ही नहीं है. दरअसल, इस योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं अस्पतालों में मिलता है जो सरकार द्वारा पैनल में शामिल होते हैं. अगर अस्पताल योजना से जुड़ा नहीं है, तो पूरा खर्च मरीज को खुद देना पड़ सकता है. इसलिए इलाज शुरू कराने से पहले अस्पताल में आयुष्मान सुविधा की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.

इसके अलावा कुछ मामलों में अस्पताल अतिरिक्त सुविधाओं के नाम पर अलग से पैसे मांग सकते हैं. जैसे प्राइवेट रूम, खास दवाइयां या कुछ अतिरिक्त टेस्ट. इसलिए मरीज और परिवार को इलाज शुरू होने से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है कि कौन-सी सुविधा मुफ्त है और किसका पैसा अलग देना होगा. आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए बहुत बड़ी राहत है और इससे लाखों लोगों को मदद मिली है. लेकिन सिर्फ कार्ड बन जाने से हर इलाज मुफ्त नहीं हो जाता. योजना के नियम और सीमाएं समझना बेहद जरूरी है. सही जानकारी होने पर ही लोग इस योजना का पूरा फायदा उठा सकते हैं और अस्पताल में होने वाली अनचाही परेशानी से बच सकते हैं.

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