कथाकार, कवि, आलोचक और चिंतक दूधनाथ सिंह का शुक्रवार को निधन हो गया. उन्होंने कहानी लेखन की एक नई शैली को जन्म दिया था. 17 अक्टूबर 1936 में बलिया के सोबन्धा गांव में जन्मे दूधनाथ सिंह की पहली कहानी 'तुमने तो कुछ नहीं कहा' धर्मयुग में छपी थी, उस समय उनकी उम्र सिर्फ 22 साल थी. इसके बाद उन्हें दूसरी कहानी 'सपाट चेहरे वाला आदमी' से पहचान मिली. उनके चर्चित उपन्यासों में 'नमो अंधकारं', 'आखिरी कलाम' और 'निष्कासन' थे. कविता संग्रह 'युवा खुशबू' और 'तुम्हारे लिए' भी मशहूर हुए. दूधनाथ सिंह नए रचनाकारों से हमेशा मिलते रहते थे. साथ ही समसामायिक साहित्य पर पैनी नजर रखते थे.