सावन के दूसरे दिन हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों का भारी जमावड़ा देखा गया है. यह भीड़ सावन के पहले सोमवार को कई गुना बढ़ जाएगी, जब लाखों श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाएंगे और कांवड़ यात्री आगे के लिए रवाना होंगे. ये यात्री दिल्ली-एनसीआर, उत्तर भारत, मध्य भारत, दक्षिण भारत और पश्चिम भारत के कई कोनों से आए हैं. यह अब सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक परंपरा, एक पर्व और एक त्यौहार बन गया है. इस त्यौहार में सजावट का तड़का भी लगता है, जैसे भोले बाबा की कांवड़ के साथ 'भूत' भी बारात में शामिल हो रहे हैं. एक यात्री ने बताया कि वे 'भूत' दिल्ली से लाए हैं. इस यात्रा में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की झलक भी दिखाई पड़ती है, जहां हर कांवड़ पर धार्मिक झंडों के साथ तिरंगा भी लगा है, जो आस्था के पर्व में देश के झंडे की मौजूदगी को दर्शाता है. यात्रा के पहले कुछ जगहों पर विवाद भी हुए, लेकिन हजारों श्रद्धालु अपनी आस्था और श्रद्धा लेकर यहां पहुंचे हैं. देश के अलग-अलग शहरों के मंदिरों में भी सावन की शुरुआत के साथ जलाभिषेक का सिलसिला जारी है. सोमवार को सावन का पहला सोमवार आने पर ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगेगा. सबसे ज्यादा भीड़ काशी विश्वनाथ और हरिद्वार में मोक्षदायिनी गंगा के किनारे देखी जाएगी. गंगा से जल भरकर यात्री अपने शिवालयों की ओर जाएंगे और शिव को अर्पित करेंगे. यात्रियों की सुरक्षा, ठहरने और बिना रुकावट यात्रा के लिए बड़े पैमाने पर व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसमें रूट डायवर्जन भी शामिल है. पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक ये यात्राएं चलती हैं. हरिद्वार के अलावा बैजनाथ धाम, बिहार और झारखंड में भी बड़ी संख्या में शिव भक्त कांवड़ लेकर निकल रहे हैं, जो आस्था, श्रद्धा और महादेव की भक्ति के विभिन्न रंगों को दर्शाते हैं.