गंगा आरती भले एक दिन छोड़ो, लेकिन इसे प्रदूषित मत करो: स्वामी चिदानंद सरस्वती

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बीते दशकों में कुंभ के बदलते स्वरूप और युवाओं में बढ़ते आध्यात्मिक रुझान की सराहना की है. उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी क्लबों और पार्टियों की चकाचौंध को छोड़कर गंगा आरती और अध्यात्म की ओर रुख कर रही है.

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स्वामी चिदानंद ने कहा गोवा-ताजमहल छोड़ गंगा आरती की करने आए युवा (Photo-चंद्रदीप कुमार, इंडिया टुडे) स्वामी चिदानंद ने कहा गोवा-ताजमहल छोड़ गंगा आरती की करने आए युवा (Photo-चंद्रदीप कुमार, इंडिया टुडे)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने विकसित उत्तराखंड 2026 में युवाओं की तारीफ करते हुए कहा कि आज के नौजवानों में धर्म और अध्यात्म के प्रति जो लगाव बढ़ रहा है, वह बहुत खुशी की बात है. उन्होंने सराहा कि युवा अब अपनी संस्कृति को अपना रहे हैं और अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, जो समाज के भविष्य के लिए बहुत अच्छा संकेत है.
 
उन्होंने आगे कहा कि बदलते परिवेश के साथ कुंभ के मायने भी निरंतर बदल रहे हैं. मैं वर्ष 1971 से अर्धकुंभ जाता रहा हूं और समय के साथ मैंने इस आस्था के स्वरूप को विस्तार लेते देखा है. इस साल प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर उमड़ा जनसैलाब कुंभ की भीड़ से भी कहीं अधिक था, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनमानस की आस्था को अब एक सही दिशा मिल रही है.

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पिछले 12-13 वर्षों में लोगों के उत्साह में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. वर्तमान में एक 'संस्कारी सरकार' के होने से जब धार्मिक संस्थाओं को सरकारी संरक्षण और प्रोत्साहन मिलता है, तो जनता का उत्साह और भी बढ़ जाता है.

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युवाओं ने आगे बढ़कर किया स्नान

चिदानंद सरस्वती ने कहा सबसे सुखद अनुभव यह रहा कि इस बार स्नान के लिए आने वालों में 80% युवा थे. नई पीढ़ी का इस बहती सांस्कृतिक धारा से जुड़ना समाज के लिए शुभ संकेत है. युवाओं के मन से अपनी संस्कृति को लेकर जो झिझक या शर्म थी, वह अब समाप्त हो चुकी है. इसका प्रमाण नए साल के आंकड़े हैं, जहां लोग पहले गोवा या ताजमहल की ओर रुख करते थे. इस बार गंगा आरती में भारी हुजूम उमड़ा. लोग अब नए साल की शुरुआत 'पीकर' नहीं, बल्कि 'पाकर' करना चाहते हैं. कुंभ में भी युवाओं की गहरी श्रद्धा स्पष्ट दिखी. लोग रात-भर ट्रैफिक की बाधाओं से जूझते हुए केवल एक पवित्र डुबकी लगाने के लिए आतुर थे.

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गंगा प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा, अगर आप एक दिन गंगा आरती नहीं करेंगे तो चलेगा, लेकिन उसे प्रदूषित बिल्कुल मत कीजिए. गंगा को गंदा करना एक 'ग्रीन क्राइम' है और जल प्रदूषण आज के समय का सबसे बड़ा संकट है.

उन्होंने कुंभ के माध्यम से सरकार को सुझाव देते हुए कहा, "अगर हम कुंभ मेले से दुनिया को कोई ठोस संदेश देना चाहते हैं, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गंगोत्री से लेकर हरिद्वार तक गंगा में एक भी गंदा नाला न गिरे. इसके साथ ही, हमें सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को पूरी तरह प्रतिबंधित करना होगा ताकि हमारी नदियां और पर्यावरण सुरक्षित रह सकें.   
 

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