लैंसडाउन में वन्यजीवों का आतंक...बच्ची को उठा ले गया तेंदुआ, बुजुर्ग को हाथी ने रौंदा

पौड़ी जिले के लैंसडाउन इलाके में वन्यजीवों का आतंक देखने को मिला है. 24 घंटे के भीतर तेंदुए के हमले में डेढ़ साल की बच्ची और हाथी के कुचलने से एक बुज़ुर्ग की मौत हो गई. लगातार हो रही घटनाओं से गांवों में डर का माहौल है और लोग वन विभाग से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.

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बच्ची को उठा ले गया तेंदुआ, बुुजुर्ग को हाथ ने रौंदा (Photo: Representational image) बच्ची को उठा ले गया तेंदुआ, बुुजुर्ग को हाथ ने रौंदा (Photo: Representational image)

aajtak.in

  • पौड़ी ,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

उत्तराखंड के पौड़ी जिले के लैंसडौन क्षेत्र में बीते 24 घंटों के भीतर वन्यजीवों के हमलों ने दो जिंदगियां छीन लीं. इन दर्दनाक घटनाओं में एक डेढ़ साल की मासूम बच्ची और एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई. लगातार हो रही वन्यजीव घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

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पहली घटना शनिवार को जयहरीखाल ब्लॉक के बरस्वार गांव में हुई. यहां एक डेढ़ वर्षीय बच्ची यशिका अपनी मां के साथ घर के आंगन में थी. इसी दौरान अचानक एक तेंदुआ आया और मां की गोद से बच्ची को झपटकर ले गया. घटना इतनी तेजी से हुई कि मां को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला. कुछ क्षण बाद जब मां ने शोर मचाया तो परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे.

ग्रामीणों ने घर से करीब 20 मीटर दूर झाड़ियों में बच्ची को खून से लथपथ हालत में पाया. आनन-फानन में यशिका को लैंसडौन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और वन विभाग में हड़कंप मच गया. लैंसडौन की उपजिलाधिकारी शालिनी मौर्य ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी ली और बताया कि इलाके में वन विभाग की टीम को तैनात कर दिया गया है.

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दूसरी घटना रविवार को लैंसडौन क्षेत्र के कोटद्वार रेंज के सुखरो बीट के जंगल में सामने आई. यहां 70 वर्षीय बुज़ुर्ग बृजमोहन सिंह अपने साथियों के साथ जंगल से सूखी लकड़ी बीनने गए थे. इसी दौरान अचानक एक जंगली हाथी उनके सामने आ गया. हाथी को देखते ही सभी लोग जान बचाने के लिए भागने लगे, लेकिन बृजमोहन सिंह संतुलन बिगड़ने से गिर पड़े.

बताया गया कि हाथी ने उन्हें कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई. घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश और भय दोनों देखने को मिल रहा है. लोगों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं.

 

 

 

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