सुरक्षित यात्रा और आधुनिक तकनीक, उत्तराखंड में कुंभ के लिए कैसे हो रही तैयारी

विकसित उत्तराखंड 2026 के विशेष सत्र में चर्चा के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार का कुंभ न केवल आस्था का संगम होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक और सुरक्षित बुनियादी ढांचे का बेजोड़ उदाहरण भी बनेगा.

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उत्तराखंड के 108 शहरों पर बढ़ रहा दबाव, बेहतर प्लानिंग और स्वच्छता से संवरेगी देवभूमि (Photo-चंद्र दीप कुमार/ इंडिया टुडे)  उत्तराखंड के 108 शहरों पर बढ़ रहा दबाव, बेहतर प्लानिंग और स्वच्छता से संवरेगी देवभूमि (Photo-चंद्र दीप कुमार/ इंडिया टुडे)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:05 PM IST

'विकसित उत्तराखंड 2026' के सत्र 'कितना बदला उत्तराखंड' में राज्य के बुनियादी ढांचे, शहरी नियोजन और आगामी कुंभ की तैयारियों पर हुई चर्चा हुई. उत्तराखंड शासन के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (ऊर्जा, आवास एवं विद्युत) डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने राज्य के विकास पर बात करते हुए कहा, पिछले 25 सालों में उत्तराखंड का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है. राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांतिकारी सुधार हुए हैं. 

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उन्होंने आगे कहा कि 2000 की तुलना में हमारा रोड नेटवर्क 6 गुना तक बढ़ गया है. राज्य में ऊर्जा की बढ़ती मांग इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यहां विकास की गति तेज हुई है. वर्तमान में ऊर्जा की खपत तीन गुना बढ़ी है. हालांकि, उत्पादन उस अनुपात में नहीं बढ़ पाया है, जिसकी भरपाई हम अन्य राज्यों से बिजली खरीदकर कर रहे हैं.

शहरीकरण और देहरादून की चुनौतियां

शहरी नियोजन पर बात करते हुए नीतीश झा ने कहा, हमारे पास वर्तमान में 108 अधिसूचित शहर हैं. बढ़ते शहरीकरण के कारण शहरों पर दबाव बढ़ा है, जो हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है. हालांकि, अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड के शहर आज भी बेहतर स्थिति में हैं. देहरादून में ट्रैफिक की समस्या पर उन्होंने स्वीकार किया कि बहुत कम समय में हुए तीव्र शहरीकरण ने चुनौतियां पैदा की हैं. इसके समाधान के लिए हम निरंतर कार्य कर रहे हैं. सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, नए रोड नेटवर्क विकसित किए जा रहे हैं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

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महाकुंभ 2026 की तैयारियां

आगामी महाकुंभ की तैयारियों पर सोनिका मीना ने कहा, हमारी सरकार और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. हमारा मुख्य ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर है ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुगम रहे. भीड़ नियंत्रण के लिए पुख्ता व्यवस्था की जा रही है. श्रद्धालुओं के ठहरने के प्रबंधों पर उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 15 से 20 लाख लोगों के आने की संभावना है, जिसे देखते हुए हम एक 'अस्थायी शहर' विकसित करने की योजना पर काम कर रहे हैं.

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