आरटीआई कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न और हत्याओं के मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर तो यूपी दूसरे स्थान पर है. एक आरटीआई के माध्यम से इसका खुलासा हुआ है.
दरअसल एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने इस मामले को लेकर के तहत जानकारी मांगी. जिसमें यह बात सामने आई है कि देश में अब तक 315 से अधिक आरटीआई आवेदकों पर जानलेवा हमले हो चुके हैं. जिनमें से 63 हमले महाराष्ट्र में हुए और 40 हमले उत्तर प्रदेश में हुए हैं. आरटीआई कार्यकर्ताओं पर बढ़ रहे मामलो में यूपी दूसरे स्थान पर है.
लखनऊ की रहने वाली सामाजिक कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने आरटीआई कार्यकर्ताओं के ऊपर बढ़ रहे हमलों को लेकर सूचना मांगी थी. उर्वशी का कहना है कि जन-साधारण का एक्ट है जिसे देश के प्रत्येक नागरिक द्वारा सरलता से प्रयोग के लिए बनाया गया है. लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने धीरे-धीरे इस एक्ट को भी कानूनी लफ्जों के मकड़जाल में उलझा दिया है.
उर्वशी का कहना है कि अब हालात इतने खराब हो गए हैं कि जन सूचना अधिकारियों से लेकर सूचना आयुक्त तक सभी इस कोशिश में लगे हैं कि कौन सा गैरकानूनी तरीका अपनाकर सूचना को सार्वजनिक करने से रोका जाए. उर्वशी के अनुसार आज हालात ऐसे हो गए हैं कि लोक प्राधिकरणों के भ्रष्टाचार एवं अनियमितताएं छुपाने के लिए जनसूचना अधिकारी सही सूचना देने की जगह कुछ भी लिखकर भेज देता है.
भ्रष्टाचार का चश्मा पहने प्रथम अपीलीय अधिकारी तो अपने फैसलों में विवेक का इस्तेमाल कर के प्राविधानों के अनुसार फैसला नहीं कर रहे हैं. लेकिन सूचना आयुक्त तो इससे भी आगे जाकर अपने सूचना दिलाने के दायित्वों का निर्वहन करने के स्थान पर आरटीआई आवेदक को 'तारीख पर तारीख' के मकड़जाल में उलझाकर लोकसेवकों और आरटीआई आवेदक का उत्पीड़न कर रहे हैं. इनमें से अनेकों मामलों में आरटीआई प्रयोगकर्ताओं को हतोत्साहित करने के लिए 315 से अधिक पर हमले भी कराए गए और 50 से ज्यादा लोगों की हत्या भी हुई है.
RTI कार्यकर्ताओं पर हमले के मामले में यूपी दूसरे स्थान पर
उर्वशी ने बताया कि हाल के 11 वर्षों में देश में 50 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है. महाराष्ट्र में 12 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, इसके बाद 8-8 हत्याओं के साथ उत्तर प्रदेश और गुजरात हैं. 5 हत्याओं के साथ बिहार तीसरे स्थान पर और 4 हत्याओं के साथ कर्नाटक चौथे स्थान पर है.
एनजीओ ने शुरू किया भ्रष्ट सूचना आयुक्त का सर्वे
सना जैदी / अनूप श्रीवास्तव