'8KM पैदल चलना पड़ा, बॉर्डर पर पुलिस ने फायरिंग भी की'... यूक्रेन से लौटे छात्र की आपबीती

यूक्रेन में फंसी लखनऊ की आकांक्षा चौरसिया और जुनैद अंसारी भी अपने घर सुरक्षित वापस आ गए हैं. वतन वापसी के बाद आकांक्षा ने बताया कि यूक्रेन की तरफ खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है, लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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लखनऊ पहुंचा जुनैद, प्रशासन ने किया स्वागत लखनऊ पहुंचा जुनैद, प्रशासन ने किया स्वागत

सत्यम मिश्रा

  • लखनऊ,
  • 02 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST
  • लखनऊ लौटे दो भारतीय स्टूडेंट
  • दोनों बताए कैसे हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन और रूस के बीच जंग जारी है. यूक्रेन में हज़ारों की तादाद में भारतीय फंसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाने की कवायद चल रही है. अब तक कई बच्चे वापस आ चुके हैं. लखनऊ की आकांक्षा चौरसिया और जुनैद अंसारी भी अपने घर सुरक्षित वापस आ गए हैं. इस दौरान आकांक्षा और जुनैद ने यूक्रेन के बिगड़ते हुए हालात के बारे में आजतक से बातचीत की.

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घर लौटी आकांक्षा चौरसिया ने कहा, 'वहां पर लगातार हमले हो रहे हैं, हम लोगों ने खुद से बस की, हम अपनी पर्सनल जिम्मेदारी पर निकल रहे हैं, रोमानियन बॉर्डर पर अभी भी कम से कम दो हज़ार लोग फंसे हुए हैं.' आकांक्षा ने बताया कि यूक्रेन की तरफ खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है, लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

यूक्रेन में फंसे हुए एक और छात्र जुनैद अंसारी ने बताया, 'वहां पर हालात ठीक नहीं हैं, लोग वहां से निकलना चाहते हैं लेकिन नहीं निकल पा रहे हैं. जुनैद की मांग है कि इंडियन एंबेसी वहां पर फोर्स के साथ जाए और फंसे हुए बच्चों को बस पर लाकर रोमानिया बॉर्डर पहुंचाए और बॉर्डर क्रॉस कराकर एयरपोर्ट से फ्लाइट के जरिए इंडिया लाए.

'यूक्रेन बॉर्डर पर बढ़ रही है भीड़'

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जुनैद अंसारी ने बताया, 'मैं वहां विंसीटी में पढ़ता हूं, हम 60 लोग एक प्राइवेट बस करके वहां से निकले, हम सब लोगों ने पैसा आपस में बांट कर बस वाले को दिया, बस वाले ने हमें 8 किलोमीटर पहले ही उतार दिया और वहां से हम लोग पैदल बॉर्डर तक पहुंचे, वहां पहुंचने के बाद हम लोग बॉर्डर क्रॉस नहीं कर पाए क्योंकि वहां पर बहुत भीड़ थी.'

जुनैद ने बताया, 'भीड़ जब बढ़ने लगी तो पुलिस ने फायरिंग भी की, उसके बाद किसी तरह हम लोग बॉर्डर क्रॉस करके यहां पर आ पाए हैं.'

सरकारी खर्चे पर लौटी मेरी बेटी: आकांक्षा की मां

आकांक्षा चौरसिया की मां ने कहा, 'अब लग रहा है कि मेरी बेटी जन्नत में आ गई है, पहले जब फोन पर बात होती तो सिर्फ रोना आता था, मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगी, मोदीजी ने हमारे लिए बहुत किया है, हमारे बच्चे बिना टिकट के सरकारी खर्चे पर आएं हैं.' यूक्रेन से देश लौटी बेटी ने भी मोदी को धन्यवाद दिया.

छत्तीसगढ़ की शालिनी भी लौटी

लखनऊ की आकांक्षा और जुनैद की ही तरह छत्तीसगढ़ की शालिनी भी घर लौट आई है. मंगलवार की शाम जैसे ही वह बस्तर पहुंची तो उसके साथ पूरे परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं था. बस्तर पहुंची छात्रा शालिनी ने बताया कि वह यूक्रेन के उज्होरोड में मेडिकल की सेकेंड ईयर में पढ़ाई कर रहीं थी, इसी दौरान युद्ध की घोषणा हुई और पूरा शहर थम गया.

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शालिनी ने बताया, 'वे जहां रुकी थी वहां से करीब 10 से 15 किलोमीटर की दूरी लेवी सिटी तक रूस की सेना अपने टैंकों के साथ पहुंच गई थी, ऐसे में यहां पर सभी भारतीय छात्र दहशत में थे, लेकिन पूरे भारत और उनके माता-पिता की दुआओं के बदौलत उनके साथ रह रहे करीब 250 छात्रों को सकुशल यूक्रेन सरकार ने बॉर्डर हंगरी तक पहुंचाया.'

जानकारी के मुताबिक बस्तर से यूक्रेन में करीब 40 छात्र फंसे हुए हैं. शालिनी उत्तरी यूक्रेन में फंसी थी. यहां से यूरोपियन देशों की सीमा काफी करीब है. यही वजह है कि अब तक यहां रूस की सेना नहीं पहुंच पाई थी, इसलिए आसानी से हंगरी के रास्ते शालिनी व उनके साथ रह रहे लगभग 250 छात्र भारत सरकार की मदद से अपने वतन वापस पहुंच गए.

(इनपुट- बस्तर से धर्मेंद्र महापात्रा के साथ लखनऊ से सत्यम मिश्र)

 

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